![]()
गयाजी में भू-स्वामियों को 14 साल बाद राहत मिली है। लंबे समय से खरीद-बिक्री और निबंधन पर लगी रोक के कारण परेशान लोगों के लिए जिला प्रशासन ने दो और भूखंडों को रोक सूची से मुक्त कर दिया है। यह कदम जमीनों की समीक्षा प्रक्रिया तेज करने के बाद उठाया गया है। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि साल 2012, 2013, 2014 और 2018 से अलग-अलग कारणों से रोक सूची में शामिल जमीनों की जांच की जा रही है। जांच में जो भूमि पूरी तरह रैयती और विवादमुक्त पाई जा रही है, उसे रोक सूची से हटाया जा रहा है। आम लोग लगा रहे थे ऑफिस के चक्कर डीएम ने स्वीकार किया कि कई साल से बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित थे, जिससे आम लोगों को कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे थे। प्रशासन ने अब ऐसे मामलों के निपटारे के लिए विशेष पहल शुरू की है। इसी क्रम में आज दो जमीनों को रोक सूची से हटाने की स्वीकृति दी गई। प्रशासन के अनुसार, वजीरगंज अंचल के भिंडस मौजा में संजय कुमार की भूमि साल 2013 से रोक सूची में दर्ज थी। विस्तृत जांच के बाद इसे विवादमुक्त और रैयती पाए जाने पर मुक्त कर दिया गया। इसी तरह, चंदौती अंचल के कंडी मौजा में गणेश चौधरी की जमीन साल 2012 से रोक सूची में थी, जिसे जांच के बाद हटाने का निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने जिला अवर निबंधन पदाधिकारी और सभी डीसीएलआर को निर्देश दिया है कि रोक सूची से संबंधित अन्य लंबित मामलों की फाइलें भी जल्द प्रस्तुत की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को बेवजह कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए और अनावश्यक रूप से रोक लगी जमीनों की जांच कर जल्द निर्णय लिया जाए। रिपोर्ट के आधार पर हटी रोक प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्यतः वे जमीनें रोक सूची में शामिल की जाती हैं, जिनके संबंध में सरकारी भूमि होने, भू-अर्जन में शामिल होने, सीलिंग विवाद, कोर्ट में लंबित वाद या अन्य कानूनी अड़चनों की सूचना हासिल होती है। ऐसे मामलों की जांच जिला स्तरीय समिति की ओर से की जाती है। इस समिति में एडीएम राजस्व, जिला अवर निबंधक, डीसीएलआर और संबंधित अंचल के अंचल अधिकारी शामिल होते हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही किसी जमीन को रोक सूची से हटाने का निर्णय लिया जाता है।
जिला प्रशासन के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में 132 से अधिक मामलों में जमीनों को रोक सूची से मुक्त किया जा चुका है। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लंबित मामलों की जांच और अधिक तेजी से की जाए, ताकि वास्तविक भू-स्वामियों को राहत मिल सके और उनकी जमीनों का निबंधन सुचारु रूप से हो सके। प्रशासन की इस पहल से सालों से परेशान लोगों में उम्मीद जगी है कि अब उनके मामलों का भी जल्द समाधान होगा।
Source link