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“कंचन एक साहसी महिला थी। वो अपने खेत में काम करती थी। रोजाना खुद ही नाव चला कर नदी को पार करती थी। बुधवार को नाव में 10 लोग सवार थे। नाव डूब गई, तो कंचन ने अपने बेटे की जान बचा ली। बच्चे को नदी किनारे धकेल दिया। लेकिन, खुद उसकी मौत हो गई। नदी में काफी देर तक उसने संघर्ष किया। 2 लोग अब भी लापता है।” ये जमालपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार का कहना है। दरअसल, दरभंगा में बुधवार को कोसी नदी में नाव पलट गई। इस घटना में एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची समेत दो लोग अब भी लापता हैं। 7 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। घटना किरतपुर प्रखंड अंतर्गत जमालपुर थाना क्षेत्र के बनरी ढलान से लगभग 500 मीटर आगे कोसी की सहायक नदी की है। तेज बहाव के बीच खेतों में मूंग तोड़ने जा रही महिलाओं और बच्चों से भरी नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई। रोज की तरह खेत जा रहे थे लोग तरवाड़ा गांव के ग्रामीण रोजाना की तरह नाव के सहारे नदी पार कर अपने खेतों में मूंग तोड़ने और अन्य कृषि काम करने जा रहे थे। नाव पर सात महिलाएं और तीन बच्चे सवार थे।
नदी में पानी का बहाव काफी तेज था। बीच धारा में पहुंचते ही नाव का संतुलन बिगड़ गया और देखते ही देखते नाव पलट गई। नाव पलटते ही सभी लोग नदी की तेज धारा में बहने लगे। आपदा मित्र और ग्रामीणों ने बचाईं आठ जानें हादसे के समय मौके पर मॉर्निंग वॉक कर रहे आपदा मित्र रविन्द्र कुमार ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए स्थानीय लोगों की मदद से राहत-बचाव अभियान शुरू किया। अपने प्रशिक्षण का उपयोग करते हुए उन्होंने नदी में डूब रहे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। रविन्द्र कुमार और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सभी घायलों और बचाए गए लोगों को तत्काल किरतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां सभी की स्थिति सुरक्षित बताई गई। प्रशासन और एसडीआरएफ ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही सिटी एसपी अशोक कुमार चौधरी एसडीओ शशांक राज, एसडीपीओ प्रभाकर कुमार तिवारी, सीओ आशुतोष सन्नी और जमालपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार घटनास्थल पर पहुंच गए। अधिकारियों ने राहत और बचाव काम की निगरानी शुरू की। एसडीओ के निर्देश पर एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची और नदी में लापता लोगों की तलाश शुरू की गई। बुधवार देर शाम तक बचाव अभियान जारी रहा। पांच किलोमीटर दूर मिला महिला का शव दोपहर करीब दो बजे हादसा स्थल से लगभग पांच किलोमीटर दूर मुसहरिया घाट के पास नदी में एक महिला का शव बरामद हुआ। शव की पहचान तरवाड़ा गांव निवासी शिवशंकर यादव की 30 साल की पत्नी कंचन देवी के रूप में हुई। कंचन देवी अपने पीछे 12 साल के बेटे पंकज कुमार और 10 साल के बेटे प्रियांशु कुमार को छोड़ गई हैं। डूबते हुए बेटे को बचाया, खुद नहीं बच सकी मां घटना के बाद सामने आई जानकारी ने सभी को भावुक कर दिया। जमालपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि कंचन देवी बेहद साहसी महिला थीं। वह स्वयं नाव चलाकर रोजाना नदी पार कर खेती-बाड़ी का काम करती थीं। उनके पति दिल्ली में मजदूरी करते हैं। थानाध्यक्ष के अनुसार नाव डूबने के दौरान कंचन देवी ने अपने बच्चों को बचाने का भरसक प्रयास किया। तेज धारा में बहते हुए भी उन्होंने अपने बेटे को नदी किनारे की ओर धकेल दिया, जिससे उसकी जान बच गई। हालांकि वह स्वयं नदी की तेज धारा से संघर्ष करते हुए अपनी जान नहीं बचा सकीं। उन्होंने बताया कि कंचन देवी को तैरना भी आता था। संभवतः वह काफी दूर तक तैरते हुए संघर्ष करती रहीं, लेकिन तेज बहाव के आगे हार गईं। यही वजह रही कि उनका शव सामान्य घटनाओं की तुलना में महज छह-सात घंटे के भीतर बरामद हो गया। बची महिलाओं ने सुनाई मौत से मुकाबले की कहानी हादसे से सुरक्षित निकली गीता देवी ने बताया कि नदी की तेज धारा देखकर कुछ समय के लिए उन्हें लगा था कि अब उनकी जान नहीं बचेगी। उन्होंने कहा, “हम सभी रोज की तरह खेत में काम करने जा रहे थे। अचानक नाव डूबने लगी। पानी का बहाव इतना तेज था कि लग रहा था अब बचना मुश्किल है। किसी तरह तैरकर बाहर निकले। भगवान की कृपा से जान बच गई।” वहीं सीता देवी ने बताया कि खेत में काम करने के बाद सभी लोग वापस लौट रहे थे। इसी दौरान बीच नदी में नाव असंतुलित होकर डूबने लगी। उन्होंने कहा- “नाव डूबते ही हम लोग पानी में कूद गए। थोड़ा-बहुत तैरना आता था। स्थानीय लोगों ने भी मदद की, जिसके कारण किनारे तक पहुंच सके। उस समय लग रहा था कि शायद अब बच नहीं पाएंगे।” नाव मालिक पर होगी कार्रवाई घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ प्रभाकर कुमार तिवारी ने जमालपुर थानाध्यक्ष को नाव मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। देर शाम तक जारी रहा सर्च ऑपरेशन थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि शाम करीब साढ़े सात बजे तक एसडीआरएफ की टीम नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाती रही, लेकिन शेष दो लापता लोगों का पता नहीं चल सका। गुरुवार को फिर से अभियान चलाकर बच्ची नेहा कुमारी (11) सहित अन्य लापता महिला अमीरा देवी (30) की तलाश की जाएगी। ग्रामीण प्रशासन से सुरक्षित नाव परिचालन और नदी पार करने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्थानीय निवासी रफीक आलम ने कहा कि यदि सालों से निर्माणाधीन पुल समय पर बनकर तैयार हो गया होता, तो लोगों को जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे नदी पार नहीं करनी पड़ती। उन्होंने कहा है कि क्षेत्र के लोग रोजाना खेती-किसानी, मजदूरी और अन्य काम के लिए नदी पार करते हैं। पुल निर्माण का काम लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसके कारण ग्रामीणों को मजबूरन नाव का सहारा लेना पड़ता है। अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन सलीम अख्तर ने कहा है कि नाव पर सवार होकर करीब 10 लोग नदी पार कर रहे थे। नदी के बीच पहुंचने पर नाव का संतुलन बिगड़ गया, जिससे नाव पलट गई। घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद आपदा मित्रों ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों की जान बचा ली। हालांकि हादसे के बाद तीन लोग लापता हो गए थे। इनमें से एक महिला, कंचन देवी का शव घटनास्थल से करीब छह से सात किलोमीटर दूर बरामद कर लिया गया है। मुजफ्फरपुर से गोताखोरों की टीम भी बुलाई दो लापता लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ की दो टीमों को लगाया गया है, जिनमें लगभग 12 जवान शामिल हैं। इसके अलावा मुजफ्फरपुर से गोताखोरों की टीम भी बुलाई गई है, जिनकी मदद से शवों की तलाश की जाएगी। उन्होंने कहा कि अंधेरा होने और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बुधवार शाम रेस्क्यू ऑपरेशन को स्थगित कर दिया गया। अब गुरुवार सुबह फिक से एसडीआरएफ सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाएगा। सलीम अख्तर ने कहा कि जैसे ही शेष दो लापता लोगों का शव बरामद होगा, राज्य सरकार की ओर से निर्धारित आपदा राहत मुआवजा राशि पीड़ित परिवारों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग कर खोज अभियान संचालित किया जा रहा है।
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