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एनएसएस के नए सिलेबस को कुलाधिपति की मंजूरी मिथिला समेत सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों में होगा लागू अंकों का पाठ्यक्रम…




बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्नातक स्तरीय नए सिलेबस को मंजूरी दी है। इसके साथ ही ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा सहित राज्य के सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा।
यह सिलेबस राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप राज्य स्तरीय सिलेबस निर्माण समिति की अनुशंसा पर तैयार किया गया है। चार वर्षीय सीबीसीएस स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे सेमेस्टर में एबिलिटी इन्हान्समेंट कोर्स (AEC-4) के अंतर्गत एनएसएस पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है, जो कुल 100 अंकों का होगा।
राज्य स्तरीय समिति की बैठक हुई थी सिलेबस निर्माण के लिए गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक 13 अक्टूबर को एनएसएस क्षेत्रीय निदेशालय, पटना में हुई थी। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी के निर्देश पर विश्वविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरएन चौरसिया ने समिति के सदस्य के रूप में बैठक में भाग लिया था। डॉ. चौरसिया ने बताया कि नए सिलेबस के तहत स्नातक के छात्र-छात्राएं चौथे सेमेस्टर में एबिलिटी इन्हान्समेंट कोर्स (AEC-4) के रूप में दो क्रेडिट वाले एनएसएस पाठ्यक्रम का चयन कर सकेंगे। इस पाठ्यक्रम में एंड सेमेस्टर परीक्षा (ESE) के 70 अंक और सतत आंतरिक मूल्यांकन (CIA) के 30 अंक निर्धारित किए गए हैं।
5 यूनिट में होगा सिलेबस उन्होंने बताया कि पांच यूनिट वाले इस सिलेबस में चार यूनिट सैद्धांतिक और एक यूनिट प्रायोगिक होगी। एनएसएस के वर्तमान और पूर्व कार्यक्रम पदाधिकारी व कार्यक्रम समन्वयक ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से कक्षाओं का संचालन करेंगे।
सिलेबस में एनएसएस का इतिहास, दर्शन, लोगो, मोटो, गीत, उद्देश्य-लक्ष्य, विशेष शिविर, आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पौधरोपण, युवा नेतृत्व, डिजिटल साक्षरता, माय भारत पोर्टल, पर्यावरण जागरूकता और फील्ड गतिविधियों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

सामाजिक विकास में भुमिका निभाएंगे छात्र डॉ. चौरसिया ने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को समुदाय से जोड़ने और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे छात्र-छात्राएं सामुदायिक सेवा और सामाजिक विकास कार्यक्रमों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। साथ ही उनके व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और चरित्र निर्माण को भी नई दिशा मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि एनएसएस सिलेबस के लागू होने से स्वयंसेवी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों में सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना का विकास होगा।



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