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चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा चिंताजनक


डंपिंग की बढ़ती चिंता के बीच वित्त वर्ष 2025 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 100 अरब डॉलर पहुंच गया है।
वाणिज्य विभाग द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में चीन से आयात 11.5 प्रतिशत बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया है, जबकि पड़ोसी देश को भारत से निर्यात 14.5 प्रतिशत कम होकर 14.2 अरब डॉलर रह गया। इसकी वजह से चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 99.2 अरब डॉलर रहा है, जो एक साल पहले 85 अरब डॉलर था।

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के कारण चीन से भारत को होने वाले निर्यात में तेज बढ़ोतरी की चिंता बढ़ी है, क्योंकि दोनों देश एक दूसरे पर भारी कर लगा रहे हैं, जो 100 प्रतिशत से ऊपर है। भारत सरकार को डर है कि इसकी वजह से अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ेगी और खासकर चीन जैसे देशों के निर्यातक अपना माल भारत को भेज सकते हैं। इसकी वजह से आयात बढ़ेगा और भारत के घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा।

यहां तक कि मार्च के दौरान चीन से आयात एक चौथाई बढ़कर 9.67 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 3 प्रतिशत घटकर महज 1.5 अरब डॉलर रहा है। चीन से आयात में तेजी की वजह इलेक्ट्रॉनिक सामान, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, सोलर सेल व औद्योगिक इस्तेमाल वाली कुछ वस्तुओं के आयात में बढ़ोतरी है।

दिल्ली के थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक और वाणिज्य मंत्रालय के पूर्व अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) की वजह से आयात बढ़ रहा है, क्योंकि यह उद्योग आयातित कंपोनेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। सरकार ने पीएलआई योजना के माध्यम से भारत को विनिर्माण का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह चिंताजनक है कि भारत से चीन को होने वाला निर्यात 14.5 प्रतिशत घटकर 14.2 अरब डॉलर रह गया है। यह 2014 में होने वाले निर्यात से भी कम है, जब रुपया उल्लेखनीय रूप से मजबूत था। ये आंकड़े चेतावनी हैं। भारत को विनिर्माण के आंतरिक अंतर को दुरुस्त करने और औद्योगिक क्षमता बढ़ाने पर निवेश करने की जरूरत है।’

भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात मार्च में 35 प्रतिशत बढ़कर 10.1 अरब डॉलर हो गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से 9 अप्रैल से ट्रंप शुल्क लागू होने के पहले अमेरिका को माल की खेप भेजे जाने की वजह से हुई है, जिस पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई है। मार्च में वस्तु निर्यात में 0.7 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की यह प्रमुख वजह है, जब वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद 42 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है।
मार्च में अमेरिका से आयात 9.6 प्रतिशत बढ़कर 3.7 अरब डॉलर हो गया। इसकी वजह से व्यापार अधिशेष 6.4 अरब डॉलर है। वित्त वर्ष 2025 के दौरान अमेरिका से आयात 7.4 प्रतिशत बढ़कर 45.3 अरब डॉलर हो गया है। अमेरिका और भारत न सिर्फ मार्च बड़े कारोबारी साझेदार रहे, बल्कि वित्त वर्ष 2025 में भी यही स्थिति रही। चीन के साथ भारत का कारोबार सबसे ज्यादा है।

वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च में भारत के प्रमुख 10 में से 6 निर्यात केंद्रों संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, चीन, सिंगापुर, सऊदी अरब बांग्लादेश को निर्यात घटा है। सिंगापुर को निर्यात सबसे ज्यादा 44.3 प्रतिशत घटा है जबकि सऊदी अरब को होने वाला निर्यात 18.5 प्रतिशत, यूएई को 15 प्रतिशत, नीदरलैंड को 15 प्रतिशत, बांग्लादेश को 14.8 प्रतिशत और चीन को 2.9 प्रतिशत घटा है।

अमेरिका के अलावा ब्रिटेन (8.4 प्रतिशत), जर्मनी (4.3 प्रतिशत) और ऑस्ट्रेलिया (70.8 प्रतिशत) को निर्यात बढ़ा है।
मार्च में कुल मिलाकर भारत का आयात 11.4 प्रतिशत बढ़कर 63.5 अरब डॉलर हो गया है जिसमें 10 प्रमुख आयात केंद्रों में से 5 देशों चीन, अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब और सिंगापुर की अहम भूमिका रही है। वहीं दक्षिण कोरिया (1 प्रतिशत), स्विट्जरलैंड (4.5 प्रतिशत), इंडोनेशिया (7.4 प्रतिशत), इराक (16.4 प्रतिशत) और रूस (1.3 प्रतिशत) से आयात कम हुआ है।


First Published – April 16, 2025 | 10:34 PM IST



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