Newswahni

समस्तीपुर में हजार प्रति किलो बिक रहा श्वेत चंदन एक पेड़ से लाख से अधिक कमाई एकड़ में हजार लगे हैं पेड़…




समस्तीपुर के कुबौली राम गांव में करीब 5 एकड़ में 3 हजार से अधिक श्वेत चंदन के पेड़ लगाए गए हैं। पेड़ की उम्र 10 साल से अधिक हो चुकी है। पेड़ों को खरीदने के लिए दूसरे राज्य से ग्राहक पहुंचने लगे हैं। कुछ पेड़ों की बिक्री भी हो चुकी है। गांव में श्वेत चंदन का पेड़ लगाने की शुरूआत श्याम किशोर सिंह ने की। किशोर बताते हैं पेड़ कम से कम 15 साल में बेचने लायक हो जाता है। ग्राहक कम से कम 6 हजार रुपए किलो की दर से खरीदते हैं। एक पेड़ कम से कम 50-60 किलो का होता है। यानी एक पेड़ कम से कम 3 से साढे 3 लाख रुपए में बिकता है। यानी अगर कोई किसान साल में 10-12 पेड़ भी बेचे तो 30-40 लाख रुपए कमा सकता है। फरवरी-मार्च पेड़ लगाने लिए बेहतर सबसे बड़ी बात है अगर सरकारी व्यवस्था के तहत पेड़ की बिक्री हो तो आमदनी और बढ़ सकती है। किशोर बताते हैं कि चंदन पेड़ लगाने का अच्छा समय फरवरी-मार्च के साथ ही अगस्त और सितंबर का महीना माना जाता है। किशोर अब दूसरों को भी चंदन का पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। जिसका नतीजा है कि उनके अलावा इस इलाके में प्रवीण कुमार, निररंजन कुमार, सुधांशु कुमार अंकुर, अजिताभ, कर्मवीर कुमार, महेश प्रसाद सिंह ने भी श्वेत चंदन के पेड़ लगाए हैं। जिससे इस इलाके में करीब 3 हजार से अधिक चंदन के पौधे हो गए हैं। इसका वैज्ञानिक नाम ‘संतलम एल्बम’ है।
श्याम किशोर ने अपने खेत में 2 हजार से अधिक पेड़ लगाए श्याम किशोर ने अपने खेत में 2 हजार से अधिक चंदन के पेड़ लगाए हैं। श्याम किशोर के पिता स्व.ज्ञानशंकर प्रसाद सिंह आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। उनकी तैनाती धनबाद में थी। पूरा परिवार उन्हीं के साथ रहता था। उनके सरकारी आवासीय परिसर में कई चंदन ने पेड़ लगे थे। जिसका उपयोग दवा के रूप में करते थे। पिता के रिटायर्ड होने के बाद श्याम वापस गांव लौटे तो उन्होंने निजी विद्यालय खोला साथ ही अपने खेतो में समान्य पौधो के बदले श्वेत चंदन का पेड़ लगाए। पेड़ अब 12-14 साल का हो चुका है। साथ ही वह साल नए पेड़ लगा रहे हैं। ताकि आने वाले दिनों में बिक्री के लिए इसका रोटेशन बना रहे। वन विभाग के समन्वय से इस पेड़ को बेचने की तैयारी भी शुरू हो गई है। पेड़ की सुरक्षा जरूरी के लिए चीप लगाने की तैयारी किसान श्याम किशोर बताते हैं कि पेड़ जब 10 सालों से अधिक का हो जाए तो इसकी सुरक्षा जरूरी हो जाती है। चुकी पेड़ महंगा बिकता है। चोरी का खतरा रहता है। हाल ही में कुबौली राम गांव से कई पेड़ की चोरी हो गई थी। पेड़ लगभग तैयार हो चुका था। चोरी से बचने के लिए किसान अब पेड़ में चीप लगाने की तैयारी कर रहे हैं। एक कंपनी से बात भी की जा रही है। जल्द ही इस इलाके के सभी पेड़ों में चीप लगाया जाएगा।
चंदन के पेड़ का क्या-क्या लाभ हैं

तने की नरम लकड़ी और कुंदा, बुरादा और छिलका बेचा जाता है। इसकी लकड़ी का उपयोग मूर्तिकला-साजसज्जा के सामान बनाने, अगरबत्ती और हवन सामग्री के निर्माण में होता है। सुगंधित तेल भी निकाला जाता है। हर साल लगभग 3,000 मीट्रिक टन चंदन की लकड़ी से तेल निकाला जाता है। एक मीट्रिक टन लकड़ी से 47 से लेकर 50 किलोग्राम तक चंदन का तेल मिलता है।
चंदन एक सुगंधित जड़ी बूटी भी है चंदन को सात्विक पेड़ के नाम से जाना जाता है। यह एक सुगंधित जड़ी बूटी है। आमतौर पर चंदन के पेड़ 30 फीट लंबे और सदाबहार होते हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि चंदन की लकड़ी में एक मनमोहक प्राकृतिक सुगंध पाई जाती है, जो सदियों तक रहती है। इस प्रकार चंदन की लकड़ी प्राकृतिक सुगंध के सबसे पुराने और सबसे मूल्यवान स्रोतों में से एक मानी जाती है। सुगंध के अलावा चंदन की लकड़ी और पत्तों से अनेक प्रकार के स्वास्थ्य लाभ भी हैं। इसलिए चंदन का व्यापक रूप से औषधीय और व्यावसायिक तौर पर उपयोग किया जाता है।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top