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बेगूसराय में बुआ की हत्या के दोषी भतीजे को उम्रकैद घर में घुसकर मारी थी गोली मां की तबीयत खराब होने का बहाना…




बेगूसराय में जनवरी 2025 में हुए चर्चित रेखा देवी हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषिकांत की अदालत ने मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी मृतका के सगे भतीजे रवि कुमार उर्फ पुट्टू को हत्या का दोषी पाया है। सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोषी रवि कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी रवि कुमार उर्फ पुट्टू को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-103 (1) एवं 3 (5) के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की राशि नहीं देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा-27 के तहत दोषी को 3 साल के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी मुकर्रर की गई है। दोनों सजाएं साथ चलेगी। देर रात आया और मार दी गोली घटना की पृष्ठभूमि बेहद चौंकाने वाली है। मामले के सूचक नीमा चांदपुरा थाना क्षेत्र के नीमा गांव वार्ड नंबर-5 के रहने वाले मणिकांत पोद्दार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना 4 जनवरी 2025 की रात करीब 10:30 बजे की है। आरोप था कि रवि कुमार उर्फ पुट्टू अपने पिता जितेंद्र कुमार उर्फ बिशो पोद्दार और दो अन्य अज्ञात लोगों के साथ सूचक के घर पहुंचा था। भतीजा रहने के कारण खोला था दरवाजा आरोपी मृतका रेखा देवी का सगा रिश्तेदार (भतीजा) था, इसलिए बिना किसी शक के घर का दरवाजा खोल दिया गया। घर के अंदर दाखिल होते ही रवि कुमार ने रेखा देवी से कहा कि उसकी मां की तबीयत बहुत खराब है और उन्हें तुरंत साथ चलना होगा। रात काफी हो चुकी थी, इसलिए रेखा देवी ने इतनी ठंड और रात में जाने से साफ इंकार कर दिया। चाय पिलाने की बात कहकर मारी गोली इसी बीच आरोपियों ने घर में चाय बनाने की मांग की। जैसे ही चाय की बात हुई, पिता जितेंद्र उर्फ बिशो के उकसाने पर रवि कुमार ने पिस्तौल निकाली और अपनी बुआ रेखा देवी को गोली मार दी। गोली लगते ही रेखा देवी की मौके पर ही मौत हो गई। जिस समय इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया, मृतका की पुत्रवधू खुशबू कुमारी भी मौजूद थी। फरार हो गए थे चार पहिया वाहन से उसने अपनी आंखों के सामने सास को दम तोड़ते देखा। घटना को अंजाम देने के बाद रवि कुमार अपने पिता और अन्य साथियों के साथ बाहर खड़ी चारपहिया गाड़ी में बैठकर मौके से फरार हो गया था। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक (PP) संतोष कुमार ने सरकार का पक्ष पुरजोर तरीके से रखा। मामले को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अभियोजन की तरफ से छह गवाहों को पेश किया गया। अहम रही गवाही इनमें ज्ञानदेव कुमार, सूचक मणिकांत पोद्दार, चश्मदीद खुशबू देवी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. सुशील कुमार गोयनका के अलावा मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) रॉली कुमारी एवं दीपक कुमार की गवाही बेहद महत्वपूर्ण रही। वैज्ञानिक साक्ष्यों और चश्मदीद की गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी को कड़ी सजा दी है। इस फैसले के बाद मृतका के परिजनों ने न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है।



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