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ईंधन की बढ़ती कीमतें पश्चिम एशिया संकट बहुत बड़ा है लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकारा बताया कैसे करेंगे मुकाबला…



वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध संकट, ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध संकट का जिक्र करते हुए इन बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

सोमवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने तीन ‘Fs’— Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Forex (विदेशी मुद्रा) के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। उन्होंने कहा ईंधन की बढ़ती कीमतें, उर्वरक की कीमतें, ये चुनौतियां तो होंगी, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है और मैं यह बात पूरी ज़िम्मेदारी के साथ कह रही हूं कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हम उन चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगे, जो हमारी वजह से पैदा नहीं हुई हैं।

सरकार का लक्ष्य जनता पर अधिक बोझ न पड़े

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “सरकार की ओर से लगभग 76 दिनों से हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। हमने इस वर्ष उत्पाद शुल्क में कटौती के माध्यम से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक राहत प्रदान की है। यदि हमने उस समय ये कटौतियां नहीं की होतीं, तो कीमतें ठीक उसी समय 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ जातीं, लेकिन वर्तमान में कीमतों में वृद्धि तेल विपणन कंपनियों की ओर से हो रही है, क्योंकि वे ही खरीद और बिक्री करती हैं।’

बढ़ते पेट्रोल के दाम पर वित्त मंत्री ने क्या कहा?

देश में बढ़ते पेट्रोल के दाम पर वित्त मंत्री ने क्या कहा ‘अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, एक हफ़्ते 83, दूसरे हफ़्ते 86, 100 या 116, तो हमें इस पर लगातार निगरानी रखनी होगी, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग पीड़ित न हों।’ इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और उन्होंने कहा MSME के बकाये का भुगतान 45 दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर करें।

कच्चे तेल में उछाल से भारत के लिए चुनौती

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश माना जाता है। इसलिए जब भी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव होता है, तो भारत में उसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। जब सेस्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ संकट खड़ा हुआ है, तब से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम जनता और माल ढुलाई पर दबाव बढ़ा है। वहीं, पिछले 10 दिन में तेल कंपनियां चार बार  कीमतें बढ़ा चुकी है।



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