
Kanpur cyber fraud gang: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गैंग का पर्दाफाश किया है। ये गैंग खेतों और गांवों में बैठकर देशभर के लोगों को फोन पर डराकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। थाना सचेंडी पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने 8 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ और ‘एनसीआरबी पोर्टल’ का इस्तेमाल करके चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े फर्जी मामलों की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद खुद को पुलिस अधिकारी बताकर फोन करते और केस दर्ज करने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर मोटी रकम वसूलते थे। ये तरीका ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले की तरह था।
अपराधियों ने जामताड़ा सीरीज से ली थी प्रेरणा
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने चर्चित वेब सीरीज ‘जामताड़ा’ देखकर ही साइबर ठगी का रास्ता चुना। पुलिस के मुताबिक गैंग के सदस्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों से जुड़े थे। कानपुर के भीमसेन क्षेत्र के तीन गांवों को पुलिस ‘मिनी जामताड़ा’ के नाम से पहचान रही है। यहां से अब तक 100 से ज्यादा साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कमिश्नरेट पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी कर रही है।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर अपराध को संगठित अपराध मानते हुए संपत्ति कुर्की और सख्त कार्रवाई का फैसला किया है। अधिकारी लोगों से अपील कर रहे हैं कि किसी भी फोन कॉल पर पैनिक न करें, पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत 1930 या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
आईपीएस अधिकारी कासिम आबिदी ने इस सफलता पर कहा कि साइबर ठगों के नए-नए तरीकों पर नजर रखी जा रही है। टीम लगातार ऐसे गैंगों पर शिकंजा कस रही है। यह कार्रवाई साइबर सुरक्षा के लिहाज से काफी बड़ी और अहम है। पुलिस का कहना है कि आम लोग सतर्क रहें, अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स पर जानकारी न दें और किसी भी दबाव में पैसे न भेजें।