Newswahni

दो बहनों से दबंगों ने किया गैंगरेप फिर बनाकर ब्लैकमेलिंग के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई तो टंकी पर चढ़ किया सुसाइड देखती…



अमृत तिवारी की रिपोर्ट

जोधपुर ग्रामीण के खेड़ापा थाना इलाके में हुई इस घटना ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया है। एक ही परिवार की दो बहनें, जो कथित तौर पर सालों तक गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना का शिकार रहीं, आखिरकार सिस्टम से हार गईं। आरोप है कि इलाके के ही कुछ लोगों ने दोनों बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, अश्लील वीडियो और फोटो के जरिए उन्हें लगातार ब्लैकमेल किया गया और डराया-धमकाया जाता रहा।

गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग से परेशान थीं दोनों बहनें

पीड़िताओं ने हिम्मत जुटाकर पुलिस तक अपनी शिकायत पहुंचाई और 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया। लेकिन परिवार का आरोप है कि गैंगरेप जैसे गंभीर मामले में FIR दर्ज होने के बावजूद पुलिस 33 दिनों तक कार्रवाई दबाकर बैठी रही। इसी बीच लगातार धमकियों और दबाव से परेशान बड़ी बहन ने पहले आत्महत्या कर ली। परिवार अभी उस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि छोटी बहन ने भी इंसाफ की उम्मीद छोड़ दी।

कार्रवाई न होने से परेशान थी दोनों बहनें 

छोटी बहन ने आत्महत्या से पहले प्रशासन को लिखित चेतावनी दी थी। उसने साफ कहा था कि अगर आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह अपनी जान दे देगी। लेकिन आरोप है कि इस चेतावनी के बावजूद पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

इसके बाद दूसरी पीड़िता पानी की टंकी पर चढ़ गई और वहीं जहर खाकर अपनी जान दे दी। टंकी पर चढ़ी लड़की को देखकर मौके पर भीड़ जमा हो गई, लोग उसे नीचे उतारने की कोशिश करते रहे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिस टंकी पर खड़े होकर लड़की ने अपनी जिंदगी खत्म की, वह अब इस पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता की गवाही देती नजर आ रही है।

पुलिस पीड़िता को सुरक्षा देती तो बच जाती जान

परिवार और समाज का आरोप है कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, आरोपियों को गिरफ्तार करती और पीड़िताओं को सुरक्षा देती, तो शायद आज दोनों बहनें जिंदा होतीं। मामले में अब पुलिस हरकत में आई है। जोधपुर ग्रामीण की एसपी पी.डी. नित्या के मुताबिक, इस केस में ई-मित्र संचालक महिपाल और गोपाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं 4 बाकी लोगों को डिटेन कर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

लेकिन सवाल सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं है। बड़ा सवाल ये है कि जब पीड़िता लगातार शिकायत कर रही थी, आत्महत्या की चेतावनी दे रही थी, तब स्थानीय पुलिस क्या कर रही थी? आखिर 33 दिन तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पुलिस की लापरवाही ने दो बहनों की जान ले ली?

अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे लोग

यही वजह है कि अब स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में है और विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है। राजपूत समाज के लोग जोधपुर के एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और परिवार को न्याय की मांग की

धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि यह सिर्फ दो बहनों की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण है। जब एक पीड़िता न्याय मांगते-मांगते आत्महत्या की चेतावनी देती है और फिर सचमुच अपनी जान दे देती है, तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें इस केस पर है। सवाल यही है कि क्या दोनों बहनों को इंसाफ मिलेगा या ये मामला भी बाकी फाइलों की तरह धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा।

यह भी पढ़ें: SC ने डॉग लवर्स को दिया झटका, पुराने आदेश में संशोधन से किया इनकार



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top