![]()
मधेपुरा शहर में व्यवस्थित शवदाह गृह नहीं होने के कारण लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब नदी किनारे कीचड़ और जलजमाव के बीच परिजनों को अंतिम संस्कार करना पड़ता है। शहरवासियों ने इस समस्या को लेकर कई बार जिला प्रशासन और राज्य सरकार से गुहार लगाई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भिरखी छठ घाट के समीप करीब 15 वर्ष पहले शवदाह गृह का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक उसे चालू नहीं किया जा सका। अतिक्रमण से एक भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया आरोप है कि शवदाह गृह परिसर पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा जमा लिया है, जिसके कारण वहां एक भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। वहीं, गुमटी नदी किनारे भी शवदाह गृह निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन पिछले दो वर्षों से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। अधूरा निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोगों को खुले घाटों पर अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने विभिन्न घाटों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। लोगों ने कहा कि शहर में अंतिम संस्कार के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। लकड़ी रखने, बारिश से बचाव, शेड, पानी और रोशनी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इससे शोक संतप्त परिवारों को कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। अविलंब शवदाह गृह निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग जन सुराज पार्टी के मुख्य जिला प्रवक्ता रंजीत सिंह, गोपी पंडित एवं अन्य लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अविलंब शवदाह गृह निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सुविधा का मामला नहीं, बल्कि मानव सम्मान और धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो जन सुराज पार्टी आम जनता के साथ मिलकर आंदोलन को और तेज करेगी। प्रशासन से मांग की है कि लंबित शवदाह गृह को शीघ्र पूरा कर अंतिम संस्कार के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
Source link