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मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय एवं VR स्टूडियो के द्वारा बनाया गया शॉर्ट फिल्म रक्तबीज जो एक बहुत ही गंभीर और सेंसिटिव मुद्दे ब्लड डोनेशन ,ब्लड ब्लैक मार्केटिंग के विषय पर बनी हुई है। इस फिल्म को भारत फिल्मी जगत का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के फिल्म पुरस्कार 2025- 26 से नवाजा गया। दादा साहब फिल्म पुरस्कार पाने वाले देश के 12 बेहतरीन फिल्म मेकर में रक्तबीज के लेखक, निर्देशक एवं मुख्य अभिनेता रोहित कुमार सिंह एवं फिल्म के प्रोड्यूसर विजय कुमार जुमनानी भी शामिल रहे। सामाजिक सेवा की मुहिम का बड़ा पड़ाव: ‘रक्तबीज’ रक्तबीज भारत की पहली ऐसी फिल्में है जो ब्लड डोनेशन और ब्लड ब्लैक मार्केटिंग के विषय पर बनी है । जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत में प्रत्येक दिन 12000 लोग खून के कमी के कारण मर जाते हैं , प्रत्येक साल का यह आंकड़ा 15 लाख से अधिक है उसके अलावा महिलाऐं गंभीर प्रसव के दौरान , थैलेसीमिया के कारण ,सर्जरी में अत्यधिक खून बहने के कारण भी लोगों की मौत होती है। जहां देश की आबादी डेढ़ सौ करोड़ है वही आज भी भारत में प्रत्येक साल 15 लाख यूनिट खून की कमी होती है इसका सबसे बड़ा कारण लोगों में जागरूकता नहीं होना है। रक्तबीज के लेखक ,निर्देशक रोहित कुमार सिंह मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। पिछले 14 साल से लगातार समाज सेवा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं साथ ही विजय कुमार जुमनानी जो इस फिल्म के प्रोड्यूसर है वह भी मानवाधिकार में सामाजिक न्याय के व्यापार प्रकोष्ठ दरभंगा के जिला अध्यक्ष है सामाजिक सेवा के मुहिम का ही एक बड़ा पड़ाव है रक्तबीज फिल्म का निर्माण। रक्तबीज फिल्म में ब्लड से जुड़े ब्लैक मार्केटिंग, ब्लड डोनेशन को लेकर के लोगों के बीच फैले हुए भ्रम पर जोरदार प्रहार किया गया है। ब्लड डोनेशन जैसे गंभीर विषय को देश भर में मजबूती के साथ उठाने के लिए इस विषय में बेहतरीन कहानी लिखने और फिल्म फिल्मांकन करने के लिए रक्तबीज के टीम को भारत फिल्म जगत का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के फिल्म पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया । फिल्म एक सशक्त माध्यम: रोहित कुमार सिंह
फिल्म के लेखक ,निर्देशक,मुख्य अभिनेता रोहित कुमार सिंह ने कहा कि फिल्म एक ऐसा माध्यम है जिस माध्यम से हम एक बार में देश के हर एक नागरिक से जुड़ सकते हैं और अपनी कहानी कह सकते हैं समाज के प्रति हम सभी उत्तरदाई हैं मैंने पिछले 14 ,15 सालों में यह महसूस किया है कि हर सप्ताह ब्लड की जरूरतमंद लोगों का कॉल आता रहता है, कभी-कभी रेयर ब्लड ग्रुप के अगर ब्लड की जरूरत पड़ जाए तो संघर्ष काफि बड़ा हो जाता है इसीलिए मैंने यह तय किया कि इस विषय पर एक फिल्म बनाऊंगा और आज टोटल 17 फिल्म फेस्टिवल में हमारी फिल्म को बेस्ट फिल्म, बेस्ट स्टोरी, बेस्ट स्क्रीनप्ले का अवार्ड मिल चुका है । 17 अवार्ड पाने के बाद दादा साहब फिल्म पुरस्कार मिलना हमारी पूरी टीम के लिए अद्भुत क्षण है आने वाले समय में हम और भी समाज के गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सके। फिल्म के प्रोड्यूसर विजय कुमार जुमनानी ने कहा कि समाज को जागरूक को बनाने के लिए कई सारे माध्यम है फिल्म भी उसी में से एक माध्यम है और हमारे संगठन देशभर में सामाजिक क्रांति के लिए जानी जाती है और रक्तबीज भी उनमें से एक है । कई शहरों में हुई स्क्रीनिंग
मुंबई ,लखनऊ ,कोच्चि ,नागपुर, कोलकाता इत्यादि शहरों में फिल्म का फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से स्क्रीनिंग किया जा चुका है ।जिन्होंने इस फिल्म को देखा है सब ने खूब तारीफ की है। फिल्म के निर्देशक ने कहा कि विशेष रूप से दरभंगा के जाने-माने चिकित्सक,प्रख्यात समाजसेवी डॉ मृदुल कुमार शुक्ला जी का विशेष धन्यवाद क्योंकि उनके बिना यह फिल्म बना पाना संभव नहीं था। उन्होंने अपना हॉस्पिटल, अपना ब्लड बैंक, जब तक फिल्म शूट हुई तब तक पूरी तरह से सौंप दिया उनका सहयोग इस फिल्म की सफलता में अद्भुत रहा है। दरभंगा के जन सेवा में समर्पित डॉक्टर मृदुल कुमार शुक्ला को पहली बार देश एक अभिनेता के रूप में देख रहा है और चारों तरफ उनके अभिनय की चर्चा हो रही है। बिहार की पूरी टीम ने की मेहनत
इस फिल्म की विशेष बात यह भी रहेगी इस फिल्म के निर्देशक और प्रोड्यूसर के अलावा टेक्नीशियन, क्रू एवं अभिनेता अभिनेत्री सभी बिहार से ही है।फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर विवेक कुमार चौधरी हैं। नवीन कुमार अमूल,जया अग्रवाल,भारती नारायण,विवेक कुमार चौधरी, ईरा बिंदवार ने अपने अभिनय से हर फिल्म फेस्टिवल में देश के बड़े बड़े फिल्म मेकर का दिल जीता है। इस फिल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर रिया जुमननी एवम शिल्पी सिंह हैं। प्रोडक्शन मैनेजर दिनेश कुमार गुलयानी “काका”है, कास्टिंग डायरेक्टर जया अग्रवाल,डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी श्रवण कुमार एवम राहुल हैं। फिल्म में अंकित कश्यप और अजय कुमार अन्नपूर्णा का भी योगदान रहा।
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