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सीवान के सीवान ट्रैक्टर महिंद्रा शोरूम में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने न सिर्फ सर्विस सेंटर की कार्यशैली, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वाहन मालिक की शिकायत कवरेज के लिए पहुंचे मीडियाकर्मी के साथ अभद्रता, मोबाइल छीनने, और गेट बंद कर बंधक बनाने की कोशिश की घटना ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है। तीन महीने से सर्विस सेंटर में फंसी स्कॉर्पियो पीड़ित रजनीश कुमार सिंह ने अपनी स्कॉर्पियो (BR01JM8596) नवंबर 2025 में एक सड़क दुर्घटना के बाद शोरूम के सर्विस सेंटर में रिपेयरिंग के लिए जमा कराई थी। सर्विस सेंटर की ओर से दो महीने में पूरा काम करने का दावा किया गया था। लेकिन तीन महीने बीत गए मरम्मत अधूरी रही और हर बार टालमटोल जवाब दिया गया। रजनीश के अनुसार, कई बार पूछने पर उन्हें “अभी पार्ट्स नहीं आए हैं”, “कल तक हो जाएगा” जैसी बातें कही जाती रहीं। GPS ऑन होने पर खुला राज, गाड़ी सर्विस सेंटर से बाहर मिली सोमवार की शाम अचानक वाहन का GPS ऑन हुआ। लोकेशन देखकर मालिक चौंक गए। गाड़ी सर्विस सेंटर से बाहर निकलकर शहर से बाहर जाती दिख रही थी। जब रजनीश ने सर्विस सेंटर मैनेजर जावेद को फोन किया, तो पहले उन्होंने गाड़ी बाहर ले जाने से साफ इनकार कर दिया। लेकिन जब रजनीश ने GPS लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया, तब जावेद ने कहा सर्वेयर गाड़ी लेकर गया है। मंगलवार को हकीकत सामने आई: गाड़ी फिर दुर्घटनाग्रस्त अगले दिन जब वाहन मालिक स्वयं सर्विस सेंटर पहुंचे और गाड़ी देखी, तो वे स्तब्ध रह गए। स्कॉर्पियो का फ्रंट हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त था। डेंट, टूटा बंपर, और क्रश्ड बोनट देखकर साफ था कि गाड़ी के साथ नया हादसा हुआ। गाड़ी के अंदर पड़े खाली बोतलनुमा सामान और दुर्गंध से आशंका जताई गई कि शराब पीकर कार चलाई गई। जबकि बिहार में शराबबंदी लागू है। वाहन मालिक ने आरोप लगाया कि सर्विस सेंटर के स्टाफ ने नशे की हालत में मेरी गाड़ी चलाई और दुर्घटना कर दी। मीडिया कवरेज पर बिफरे शोरूम मालिक के बेटे और मैनेजर मामले की जानकारी मीडिया को दी गई। जब एक पत्रकार घटनास्थल पर पहुंचा, तो शोरूम मालिक के बेटे और मैनेजर जावेद का व्यवहार अचानक आक्रामक हो गया। पीड़ित पत्रकार के अनुसार पहले मोबाइल छीन लिया गया फिर मुख्य गेट बंद कर दिया गया। पत्रकार और वाहन मालिक को अंदर बंधक करने की कोशिश की गई। धमकी दी गई कि मार देंगे, बाहर बुला रहे हैं लोग, वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि कुछ लोग लोहे की रॉड और अन्य सामान निकालने की बात कर रहे हैं, जबकि कई लोग बीच-बचाव कर रहे थे। यह प्रेस की आजादी पर हमला है- पीड़ित घटना से आहत पत्रकार ने कहा हम सिर्फ एक शिकायत की हकीकत दिखाने गए थे। जिस तरह से मोबाइल छीना और गेट बंद कर हमें घेरा गया, यह लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। वाहन मालिक रजनीश ने भी कहा मेरी गाड़ी की तोड़फोड़ की गई और पूछने पर उल्टा पत्रकार पर हमला कर दिया गया। यह गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। दोनों पक्षों की शिकायत पर FIR दर्ज घटना के बाद दोनों पक्ष नगर थाना पहुंचे और आवेदन दिया। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार ने बताया आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बताया कि शोरूम परिसर में लगे कैमरे के फुटेज भी जांच के दायरे में हैं। ग्राहकों के वाहन की सुरक्षा पर उठे सवाल यह घटना सर्विस सेंटर की लापरवाही को उजागर करती है। सवाल उठ रहे हैं ग्राहक की गाड़ी सेंटर में रहते हुए बाहर क्यों गई? शराबबंदी के बावजूद वाहन का उपयोग कैसे हुआ? दुर्घटना होने पर इसे छुपाने की कोशिश क्यों की गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सर्विस सेंटरों पर ग्राहकों की गाड़ियों के दुरुपयोग के आरोप लगे हों। अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या? घटना के बाद शहर में चर्चा तेज है। लोग कह रहे हैं अगर खबर दिखाने गए पत्रकार के साथ यह हो सकता है, तो आम आदमी के साथ क्या होगा? इस घटना ने न केवल सर्विस सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी बताया है कि सच उजागर करने वालों को कैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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