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सहरसा में गुरुवार को केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का व्यापक असर दिखा। संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर हजारों मजदूर, किसान और विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। उन्होंने वीर कुंवर सिंह चौक पर घंटों सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और बाद में जिला समाहरणालय का घेराव भी किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों में हाल ही में लागू चार लेबर कोड कानूनों को वापस लेने, किसानों के लिए कानूनी गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने और मनरेगा को उसके पूर्व स्वरूप में बहाल करने की मांग की। उन्होंने दलित-गरीबों को वास-आवास की गारंटी देने की भी मांग उठाई। इसके अतिरिक्त, ‘बुलडोजर राज’ के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई। ”लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले कानून” इस कार्यक्रम का नेतृत्व किसान सभा के राज्य संयुक्त सचिव रंधीर यादव, सीटू नेता नसीमुद्दीन, एटक नेता प्रभुलाल दास और एक्टू नेता मुकेश कुमार सहित अन्य वामपंथी संगठनों के नेताओं ने किया। सभा को संबोधित करते हुए किसान सभा के प्रदेश नेता विनोद कुमार ने कहा कि लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले कानून हैं। ”एमएसपी लागू न करना सरकार की विफलता” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट घरानों के हित में श्रमिकों के हड़ताल के अधिकार को सीमित कर रही है और किसानों के लिए एमएसपी लागू न करना सरकार की विफलता है। वक्ताओं ने मनरेगा को कमजोर कर नई योजनाएं लागू करने को मजदूरों के साथ धोखा बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हड़ताल में सीटू, एटक, एक्टू, किसान सभा, खेग्रामस, आरवाईए, डीवाईएफआई, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल हुए। पटोरी, नवहट्टा, महिषी, सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, बनमा इतहरी, पटरघट और सौर बाजार जैसे प्रखंडों से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात कुछ समय के लिए बाधित हुआ।
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