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पटना में 18 मार्च को प्रस्तावित ‘समता महाजुटान’ और राजभवन मार्च की तैयारियों को लेकर सहरसा में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में, ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी एवं यूजीसी रेगुलेशन समता आंदोलन, सहरसा चैप्टर के तत्वावधान में रविवार को गांधी पथ स्थित शहीद जयप्रकाश भवन में संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सौरबाजार नगर पंचायत के विधायक प्रतिनिधि अमित कुमार ने की, जबकि युवा नेता सुबोध कुमार ने इसका संचालन किया। यूजीसी रेगुलेशन 2026 का विरोध करने वाले लोग जातिवादी बैठक में पूर्व विधायक मनोज मंजिल और आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। पूर्व विधायक मनोज मंजिल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय समाज में वर्ण-जाति आधारित भेदभाव और विशेषाधिकार की व्यवस्था आज भी एक कड़वी सच्चाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 का विरोध करने वाले लोग अपनी वर्चस्ववादी और जातिवादी मानसिकता को उजागर कर रहे हैं। मंजिल ने जोर देकर कहा कि देश और शैक्षणिक संस्थान मनुवादी सोच से नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान से चलेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि निजी विश्वविद्यालयों और न्यायपालिका में आरक्षण नहीं होने के कारण वंचित तबकों को अवसर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बिहार में लागू किए गए 65 प्रतिशत आरक्षण का भी उल्लेख किया, जिसे विधानसभा से पारित कर लागू किया गया था। असमानता के कारण दलित, पिछड़े छात्रों के साथ भेदभाव आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि समाज में व्याप्त असमानता के कारण दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय के छात्रों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने यूजीसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस तरह की घटनाओं में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए संस्थागत भेदभाव पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। कुमार ने बताया कि 18 मार्च को संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर पटना में समता महाजुटान और राजभवन मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक में राजद जिलाध्यक्ष मो. ताहिर, प्रदेश महासचिव धनिकलाल मुखिया सहित कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि और दर्जनों छात्र-युवा उपस्थित थे।
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