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शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने का साधन नहीं जीने की कला



एजुकेशन रिपोर्टर|दरभंगा नागार्जुन उमेश संस्कृत महाविद्यालय, तरौनी, दरभंगा में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान एवं नोडल पदाधिकारी वीर सनातन पूर्णेंदु राय के संयोजकत्व में गुरुवार को निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय स्वामी विवेकानंद का शिक्षा दर्शन”” था। संयोजक सनातन ने कहा, शिक्षा सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मबल और अध्यात्म का आधार है। वहीं, डॉ राम संयोग राय प्रभारी प्रधानाचार्य ने कहा, शिक्षा वह जानकारी नहीं है जो हम अपने मस्तिष्क में भर लेते हैं, बल्कि चरित्र निर्माण, मानसिक शक्ति और स्वावलंबन है। इस प्रतियोगिता में शास्त्री, उपशास्त्री के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। निर्णायक मंडल द्वारा किए गए मूल्यांकन के आधार पर प्रथम स्थान अंजू कुमारी, द्वितीय स्थान कबीर दास एवं तृतीय स्थान रंजीत राम को प्राप्त हुआ। विजेताओं को महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ शिवलोचन झा ने पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही, उन्होंने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा, शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो मनुष्य को जीवन जीने के संघर्षों से लड़ने के लिए सामर्थ्य बनाती है। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रेणु झा, डॉ विभूतिनाथ झा डॉ सुजीत कुमार एवं शिक्षकेतर कर्मचारी मुकुंद कुमार उपस्थित थे।



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