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रोबोटिक सर्जरी से खून की बचत रिकवरी में तेजी पटना रुबन अस्पताल के डॉ बोले से अधिक ऑपरेशन रहे सक्सेस दर्द कम छोटे…




पटना में रोबोटिक सर्जरी आधुनिक चिकित्सा के एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आ रही है। इस तकनीक का एक प्रमुख लाभ यह है कि सर्जरी के दौरान खून की आवश्यकता काफी कम हो जाती है। रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल के सीनियर सर्जन डॉ. सत्यजीत सिंह ने बताया कि जहां पारंपरिक सर्जरी में औसतन चार यूनिट तक खून की जरूरत पड़ती है, वहीं रोबोटिक सर्जरी में अधिकांश मामलों में केवल एक यूनिट रक्त ही पर्याप्त होता है। डॉ. सत्यजीत सिंह ने शुक्रवार को यह जानकारी दी, जब उन्होंने पटना में 100 से अधिक रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली थीं। उन्होंने बताया कि अब बिहार के मरीज भी इस नई और अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठा रहे हैं। रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें सर्जरी के दौरान दर्द कम होता है और चीरे भी बहुत छोटे लगाए जाते हैं। इससे शरीर पर दाग-धब्बे या निशान भी लगभग न के बराबर रहते हैं। संक्रमण का खतरा पारंपरिक सर्जरी की तुलना में काफी कम डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि रोबोटिक सर्जरी में संक्रमण का खतरा पारंपरिक सर्जरी की तुलना में काफी कम होता है। मरीजों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि वे अधिकतर मामलों में सर्जरी के अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी पाकर घर लौट सकते हैं। वर्तमान में प्रोस्टेट, स्त्री रोग (गायनोकोलॉजी) और लीवर से संबंधित सर्जरी में रोबोटिक तकनीक का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को डॉक्टरों के लिए एक रोबोटिक सर्जरी प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित डॉक्टरों ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकें इलाज को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बनाती हैं, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। अधिक से अधिक मरीजों को मिलेगा लाभ कार्यक्रम में मौजूद डॉ. रवि रंजन ने बताया कि हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण से डॉक्टरों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तकनीक के सही उपयोग की समझ भी विकसित होती है। इससे भविष्य में अधिक से अधिक मरीजों को इस उन्नत तकनीक का लाभ मिल सकेगा। डॉ. सत्यजीत सिंह ने यह भी बताया कि रोबोटिक सर्जरी की मदद से अब देश के किसी भी हिस्से या विदेश में बैठे विशेषज्ञ डॉक्टर भी पटना में मौजूद मरीजों का ऑपरेशन कर सकते हैं। यह तकनीक बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा देने का काम कर रही है।



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