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राहुल गांधी पर बयान को लेकर कांग्रेस में टकराव पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने की कड़ी प्रतिक्रिया कहा ये तथ्यहीन हैं भाजपा…




कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व वरिष्ठ नेता शकील अहमद द्वारा राहुल गांधी पर दिए गए बयान को लेकर पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे बयान न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि पार्टी के संघर्ष को कमजोर करने वाले भी हैं। चुनाव के समय से ही पार्टी में बना हुआ है टकराव पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय से ही पूर्व सांसद के बयानों को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार दिए जा रहे बयान न तो तथ्यों पर आधारित हैं और न ही उनका सच्चाई से कोई लेना-देना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान पार्टी के भीतर भ्रम पैदा करते हैं और आम कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाता है। सरकार के खिलाफ संघर्ष की जरूरत, लेकिन भटकाव पैदा किया जा रहा मौजूदा राजनीतिक हालात पर टिप्पणी करते हुए शकील अहमद खान ने कहा कि आज देश में सरकार के खिलाफ मजबूत संघर्ष की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में संविधान और उसके संरक्षण पर लगातार हमले हो रहे हैं। पूर्व विधायक के अनुसार, संविधान की मूल भावना के साथ लगातार छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में पार्टी को एकजुट होकर संघर्ष को धार देने की जरूरत है, लेकिन इसके उलट निराधार आरोप लगाकर भटकाव पैदा किया जा रहा है। किसान, महिला और युवा सबसे अधिक परेशान शकील अहमद खान ने कहा कि देश में किसान, महिलाएं और युवा वर्ग गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसान अपनी फसलों के उचित मूल्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं, महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं और युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने के बजाय अगर कांग्रेस के भीतर ही इस तरह के बयान दिए जाएंगे, तो इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन बयानों से सबसे ज्यादा खुशी भाजपा को हो रही है। यूजीसी के नए नियमों पर भी जताई चिंता यूजीसी के नए नियमों से जुड़े एक सवाल पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों में आज भी जातीय सूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जिससे संबंधित वर्गों को गहरी मानसिक पीड़ा होती है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय हजारों वर्षों से सामाजिक उत्पीड़न का शिकार रहा है और उन्हें जातीय आधार पर पीछे रखा गया। यही वजह है कि सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए आरक्षण जैसी नीतियां लाई गईं। आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक गैर-बराबरी को खत्म करना पूर्व विधायक ने कहा कि जब ओबीसी आरक्षण लागू हुआ था, तब भी उसका विरोध किया गया। बाद में पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा आया, तो उस पर भी सवाल खड़े किए गए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही सामाजिक गैर-बराबरी को खत्म करना है। समानता और सामाजिक न्याय के लिए ठोस प्रयास जरूरी शकील अहमद खान ने जोर देकर कहा कि समाज में बराबरी और सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए ठोस और ईमानदार प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा हमेशा से संविधान, समानता और सामाजिक न्याय के पक्ष में रही है और पार्टी को इसी रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अंत में कहा कि कांग्रेस के भीतर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से निराधार बयान देकर पार्टी और आंदोलन को कमजोर करना उचित नहीं है।



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