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बांका जिले के किसानों के लिए रबी मौसम में राहत भरी खबर सामने आई है। जिले में रबी फसलों के संभावित उत्पादन को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से सहायता योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत फसल कटनी प्रयोग (सीसीई) के आधार पर यदि वास्तविक उपज दर में कमी पाई जाती है, तो किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाएगी, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे। योजना के अंतर्गत अलग-अलग रबी फसलों के लिए आवेदन की अंतिम तिथियां निर्धारित की गई हैं। 28 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं किसान रबी मक्का के लिए किसान 28 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। चना और मसूर के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 फरवरी तय की गई है। वहीं राई-सरसों, आलू और रबी टमाटर के लिए 31 जनवरी तक आवेदन की सुविधा दी गई है। गन्ना फसल के लिए 28 फरवरी तक तथा रबी अरहर और रबी मिर्च के लिए 31 मार्च तक आवेदन किया जा सकेगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो और योजना का लाभ समय पर मिल सके। जिला सहकारिता पदाधिकारी जैनूल आबदीन अंसारी ने बताया कि यह योजना फसल कटनी प्रयोग पर आधारित है। यदि प्रयोग के दौरान वास्तविक उपज दर में कमी पाई जाती है, तो पात्र किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेज करना होगा अपलोड आवेदन के दौरान आवश्यक दस्तावेजों में भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र या 31 मार्च 2025 तक की अद्यतन लगान रसीद, स्व-घोषणा पत्र तथा बुआई क्षेत्र से संबंधित जानकारी शामिल है। इन सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। जो किसान स्वयं ऑनलाइन आवेदन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए प्रखंड स्तर पर आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर एक समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति आवेदन प्रक्रिया, फसल कटनी प्रयोग तथा भुगतान से जुड़े कार्यों की निगरानी करेगी। फसल कटनी प्रयोग के परिणामों को 15 जून तक संबंधित पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद योग्य और पात्र किसानों को 31 जुलाई तक सहायता राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।
7,500 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा
किसानों का कहना है कि यह योजना राहत देने वाली है, लेकिन इसका दायरा और बढ़ाया जाना चाहिए। प्रावधान के अनुसार यदि फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक की कमी पाई जाती है, तो किसानों को 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं 20 प्रतिशत से अधिक उत्पादन ह्रास होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। योजना के तहत एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर तक, यानी 20,000 रुपये तक की सहायता राशि ही मिल सकेगी। सहकारिता विभाग किसानों को योजना से जोड़ने के लिए लगातार जागरूकता अभियान भी चला रहा है।
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