![]()
पटना के गर्दनीबाग इलाके में 19 साल की युवती के साथ छेड़छाड़ और मारपीट का मामला सामने आया है। युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। युवती बैंक में प्राइवेट कर्मी के तौर पर काम करती है। अपने परिजनों के साथ रेंट पर रहती है। बाथरूम में झांकने का विरोध करने पर पीटा पीड़िता ने बताया कि पिछले 3 महीने से पड़ोस का रहने वाला प्रिंस नाम का युवक दलित और कमजोर समझ कर परेशान कर रहा है। मेरे बाथरूम में अक्सर ताक झांक करता रहता था। जब मैं नहाने जाती थी, तो झांककर अंदर देखता था। ड्यूटी के लिए जाती थी तब छेड़खानी भी अक्सर कर रहा था। लेकिन मैं इग्नोर कर के बचती रही। मंगलवार की शाम 6 बजे मैं नहा रही थी, इसी बीच हर बार की तरह बाथरूम में झांककर मुझे देख रहा था। मैंने रंगे हाथ पकड़ लिया। फिर हिम्मत जुटाकर इस बात का विरोध किया। इससे नाराज होकर मेरे घर में प्रिंस की मां, बहन, पिता घूस गए और बहुत मारा पीटा। पिछले 2-3 महीने से अक्सर मैं ड्यूटी से लौटकर आती हूं, तब फब्तियां कसता है। मुझे सरेआम छेड़ता है। बाथरूम में जाती हूं, तब परेशान करता है। मैं पूरी तरह से तंग हो चुकी हूं। हिम्मत जुटाकर थाने आई। लेकिन मदद करने की बजाय कोई रिस्पॉन्स नहीं लिया गया। थाने पर मुझसे कहा गया कि प्रिंस ने भी तुम्हारे भाई के खिलाफ कंप्लेन किया है। तुम्हारे भाई पर 30 लाख लूटने का आरोप लगाया है। प्रिंस थाने पर आयेगा तब तुम्हारा और उसका यानि दोनों का केस रजिस्टर्ड होगा। भाई के खिलाफ चोरी के आवेदन के लिए उकसाया पीड़िता के भाई ने बताया कि मैं अपनी बहन के साथ हुई छेड़खानी का विरोध किया तो मुझे भी पीटा गया। पड़ोस की एक आंटी आईं तो उनके बेटे को पीटा गया। थाने पर आने के बाद मंगलवार की रात में 5 घंटे बैठाया गया। इसके बाद बुधवार की सुबह से बैठाकर रखा गया। थाने के एक पदाधिकारी ने प्रिंस के परिजनों को मदद पहुंचाई। मेरे खिलाफ चोरी के आवेदन देने के लिए प्रिंस के परिजनों को बोला गया। बुधवार की शाम FIR दर्ज हुई फिलहाल पीड़िता के आवेदन के आधार पर गर्दनीबाग थाने में केस रजिस्टर्ड किया गया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। इसके लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मंगलवार की शाम गर्दनीबाग थाने पर आरोपी के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचीं थी। वहां रिस्पॉन्स नहीं लिया गया। इसके बाद SC ST थाने में परिजन के साथ गई। वहां बोला गया कि पहले एविडेंस लाओ कि तुम्हें जाति आधारित टिप्पणी या गाली दी गई है या नहीं। फिर पीड़ित लौटकर गर्दनीबाग थाने पर पहुंची। मंगलवार की शाम 5 घंटे और बुधवार की सुबह से शाम तक बैठी रही। लेकिन कार्रवाई नहीं होता देख थाने के गेट के पास रोने लगी। इसके बाद थाने के कर्मी उसे अंदर लेकर गए और केस रजिस्टर्ड कर के रिसीविंग दे दी। पीड़िता की मदद करने एक पड़ोस की महिला भी आई थी।
Source link