
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को संसद ने ध्वनि मत से खारिज कर दिया। दो दिनों की सुनवाई के बाद आज पहली बार सदन को संबोधित करते हुए बिरला ने सभी आरोपों का खंडन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समान अवसर प्रदान किए, और सदन की मर्यादा भंग करने पर ही कठोर कदम उठाए।
अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई के दौरान खुद को स्पीकर की कुर्सी से दूर रखने वाले बिरला ने कहा, “सबको बराबर बोलने का मौका दिया गया। अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक चर्चा चली। यह 140 करोड़ जनता का सदन है। हमने नियमों के साथ निष्पक्षता बनाए रखी।”
उन्होंने विपक्ष के ‘आवाज दबाने’ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए संसदीय परंपराओं का हवाला दिया। “सदन में सहमति-असहमति की लंबी परंपरा रही है। मैंने हर सदस्य की बात को गंभीरता से सुना और समर्थन-अलोचना दोनों के लिए आभारी हूं। आसन किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि संस्था का है।”
‘सदन को निष्पक्षता, अनुशासन और संतुलन के साथ चलाने का हर प्रयास किया’
अपने संबोधन की शुरुआत में बिरला ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सदन को निष्पक्षता, अनुशासन और संतुलन के साथ चलाने का हर प्रयास किया। प्रत्येक सदस्य को नियमों के दायरे में विचार व्यक्त करने का समय दिया। नैतिक कर्तव्य निभाते हुए अविश्वास नोटिस मिलते ही उन्होंने खुद कार्यवाही से अलग हो गए।
बिरला ने कुछ सदस्यों के दावों पर तंज कसते हुए कहा, “कुछ का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष सदन से ऊपर हैं और बिना नियमों के बोल सकते हैं, लेकिन ऐसा कोई विशेषाधिकार नहीं। चाहे प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों या विपक्षी नेता, सभी को नियमों का पालन करना पड़ता है। ये नियम सदन ने ही बनाए हैं।”