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बेगूसराय को विकास के शिखर पर ले जाने और पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए नीति आयोग के निर्देशानुसार संपूर्णता अभियान 2.0 का आगाज हो गया है। शुक्रवार को कंकौल स्थित प्रेक्षागृह-सह-आर्ट गैलरी में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस अभियान की शुरुआत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अभियान का उद्देश्य विकास के प्रमुख मानकों पर पिछड़े जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में लक्षित सुधार करना है। जिले के पिछड़े प्रखंडों की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को और गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शिशुओं का जन्म के समय वजन, टीबी अधिसूचना, आंगनवाड़ी पोषण दिवस, बालिका शौचालय की उपलब्धता एवं पशु टीकाकरण जैसे सूचकांकों पर विशेष फोकस किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर बच्चों को पूरक पोषाहार, आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का शारीरिक मापन, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय सुविधा तथा मवेशियों के टीकाकरण को प्राथमिकता दी जाएगी। अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए पिरामल फाउंडेशन को जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए तकनीकी सहयोग, क्षेत्रीय मार्गदर्शन एवं जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। संपूर्णता में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजना का लाभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि मोदी सरकार का संकल्प देश के उन जिलों का कायाकल्प करना है जो दशकों से उपेक्षित रहे हैं। संपूर्णता अभियान का अर्थ ही है किसी भी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक 100 प्रतिशत पहुंचाना। नीति आयोग की ओर से निर्धारित शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के मानकों पर बेगूसराय को अव्वल बनाना है। यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बनना चाहिए। 6 मुख्य सूचकांकों पर रहेगा विशेष फोकस रहेगा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 6 मुख्य सूचकांकों पर रहेगा विशेष फोकस रहेगा, जिसमें जन्म के समय शिशुओं का मानक वजन सुनिश्चित करना। जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग और उपचार करना है। आंगनवाड़ी पोषण दिवस से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तथा स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वच्छता और सुविधाओं का विस्तार करना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए शत-प्रतिशत मवेशियों का टीकाकरण एवं मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण करना है। गिरिराज सिंह ने जोर देकर कहा कि बेगूसराय में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानव विकास सूचकांक पर काम करना प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पंचायत स्तर पर जाकर इन योजनाओं की मॉनिटरिंग करें। उन्होंने लोगों से अपील किया है कि वे स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूक बनें। जिससे बेगूसराय को बिहार ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी आकांक्षी जिलों में गिना जा सके। योजनाएं कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए- गिरिराज अपने संबोधन में गिरिराज सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि विकास की परिभाषा तभी सार्थक है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि संपूर्णता का अर्थ है कि यदि किसी गांव में 100 लोग पात्र हैं, तो योजना का लाभ 100 के 100 लोगों को मिलना चाहिए। एक भी व्यक्ति छूट गया, तो वह संपूर्णता नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में खानापूर्ति नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहिए। चाहे वह शिशुओं का वजन हो या बालिकाओं के लिए शौचालय, हमें लक्ष्य को समय सीमा के भीतर हासिल करना होगा। डेटा की शुद्धता और जमीनी हकीकत में अंतर नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि आकांक्षी जिले अब पिछड़े न कहलाएं, बल्कि वे विकास के रोल मॉडल बनें। बेगूसराय में यह क्षमता है और हम इसे नंबर वन बनाकर रहेंगे। 14 अप्रैल तक हासिल करना है निर्धारित लक्ष्य- डीएम डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि नीति आयोग का यह कार्यक्रम पूरे देश में चल रहा है। इसके तहत देश के 112 जिले आकांक्षी जिला की श्रेणी में आते हैं, जिनमें हमारा बेगूसराय भी शामिल है। इसके अलावा देश के 500 प्रखंड को आकांक्षी प्रखंड के रूप में चुना गया है, जिसमें बेगूसराय के 4 प्रखंड भगवानपुर, तेघड़ा, मंसूरचक एवं शाम्हो शामिल हैं। जिला स्तर पर इस योजना के 5 मुख्य घटक स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, शिक्षा एवं वित्तीय समावेशन और कौशल विकास है। जबकि, प्रखंड स्तर पर इसके 6 घटक हैं जो इन्हीं मुख्य विभागों से संबंधित हैं। हमारा लक्ष्य इन सभी क्षेत्रों में निर्धारित मानकों को शत-प्रतिशत हासिल करना है। यह विशेष अभियान 14 अप्रैल तक चलेगा। इस तीन महीने में सभी संकेतकों में पूर्ण उपलब्धि प्राप्त करने पर नीति आयोग द्वारा जिले को सम्मानित किया जाएगा।
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