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रोहतास के नौहट्टा प्रखंड जयंतिपुर में कम दाम पर धान खरीद का आरोप किसानों में बढ़ा आक्रोश…

नौहट्टा प्रखंड के जयंतिपुर पंचायत में PACS (प्राथमिक कृषि साख समिति) के माध्यम से हो रही धान खरीद को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि PACS केंद्र पर धान की खरीद तो की जा रही है, लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

किसानों का कहना है कि सरकार ने किसानों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से धान का MSP तय किया है, ताकि उन्हें अपनी फसल का सही दाम मिल सके। लेकिन जयंतिपुर PACS केंद्र पर इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। किसानों के अनुसार, धान खरीद के समय उन्हें MSP से कम कीमत देने की बात कही जाती है, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

बलभद्रपुर गांव की किसान कलावती देवी ने बताया कि जब वह अपना धान बेचने के लिए PACS केंद्र पर पहुंचीं तो उन्हें भी तय समर्थन मूल्य से कम कीमत मिलने की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि धान की खेती में काफी मेहनत और लागत लगती है, लेकिन जब सही दाम नहीं मिलता तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

अन्य किसानों ने भी इसी तरह की शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि कई किसानों को धान बेचने के दौरान अलग-अलग बहाने बनाकर कम कीमत देने की कोशिश की जा रही है। किसानों का यह भी आरोप है कि इस संबंध में PACS प्रबंधन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

किसानों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (BCO) से भी की है, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को भी मजबूर हो सकते हैं।

स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि धान की खरीद सरकार द्वारा तय MSP के अनुसार ही हो। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उचित मूल्य दिलाने की बात करती है, लेकिन अगर जमीनी स्तर पर ही नियमों का पालन नहीं होगा तो किसानों का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा। इसलिए प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

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