
गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट
कानपुर में शाम छह बजे जीआईसी चुन्नीगंज ग्राउंड में अचानक तेज धमाके हुए तेज आवाज में सायरन बजा। हवाई हमला होने का अनाउंसमेंट हुआ। इतना सब होते ही मौके पर मौजूद लोग जमीन पर लेट गए और अपने कान को बंद कर लिया। चंद पलों में ही बिजली गुल हो गई, ब्लैक आउट हुआ और चारो ओर अंधेरा छा गया।
कुछ देर बाद मौके पर एंबुलेंस आईं और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले गईं। यह कोई हमला या घटना नहीं बल्कि मौका था सुभाष चंद्र बोस की जयंती (23 जनवरी) के मौके पर हुई मॉकड्रिल का। मौके पर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार, सिविल डिफेंस के वालंटियर, एनसीसी कैडेट्स, फायर डिपार्टमेंट के अफसर व कर्मचारी मौजूद रहे।
करीब 30 मिनट तक ब्लैक आउट रहा। इस दौरान कर्नलगंज, ग्वालटोली, नई सड़क, साइकिल मार्केट, यतीमखाना, बेकनगंज, तलाक महल, परेड, पीपीएन मार्केट आदि क्षेत्रों की 30 मिनट के लिए बिजली काट दी गई। दरअसल यह अभ्यास युद्ध के समय हवाई हमलों जैसे हालात में दुश्मन से लोकेशन छिपाने और सुरक्षा की तैयारियों को परखने के लिए किया गया। सिविल डिफेंस, एनडीआरएफ, होमगार्ड, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ मॉक ड्रिल में शामिल हैं।
इन-इन जगहों पर हुई मॉकड्रिल
लाल इमली चौराहे पर ब्लैकआउट के दौरान सड़कों पर अंधेरा छा गया। केस्को ने शटडाउन कर दिया। साइकिल मार्केट की बिजली काट दी गई। सबसे पहले जीआईसी ग्राउंड पर सायरन बजा। इसके बाद ब्लैकआउट हुआ। धमाके के बाद मौके पर दमकल कर्मी, पुलिस और एंबुलेंस पहुंच गई। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
क्या बोले कानपुर के DM?
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आपदा की परिस्थितियों में दुश्मन देश के इरादों को असफल करने के लिए इस अभ्यास को किया गया है। नागरिकों को भी सुरक्षा का माहौल बनाए रखने में अहम योगदान है। जो देश शांतिकाल में पसीना बहाते हैं। उन्हें युद्धकाल में खून नहीं बहाना पड़ता है।