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देश में कॉमर्शियल गैस सप्लाई बंद सिलेंडर की डील घरेलू गैस से रिफलिंग कर रहे एजेंट्स बोले एजेंसी वाले भी हमारे पास ही…




कॉमर्शियल वाला खाली सिलेंडर दीजिए हम घरेलू गैस से रिफिल कर देंगे। एक दो नहीं जितने चाहिए सिलेंडर मिल जाएंगे। सरकार ने कॉमर्शियल सिलेंडरों पर सख्ती की है, घरेलू गैस पर कोई रोक नहीं है। आप तो पैसा दीजिए जितना चाहिए गैस की व्यवस्था हो जाएगी। एजेंसी से सेटिंग है, इसलिए कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी। बस किसी को पता नहीं चलनी चाहिए, गैस कहां से आ रही है। रसोई गैस को लेकर देश में मची मारामारी के बीच बिहार के एजेंट्स के दावे चौकाने वाले हैं। एक दो नहीं 1000 सिलेंडर की डील करने को तैयार हैं। एजेंट्स और एजेंसी के बीच की सेटिंग को एक्सपोज करने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने ऑपरेशन चलाया। होटल संचालक बनकर अंडर कवर रिपोर्टर ने कैमरे पर 100 से अधिक एजेंट्स से 1000 सिलेंडर की डील की है। देखिए और पढ़िए बिहार में आपके घरों की गैस कैसे होटल और रेस्टोरेंट्स के कामर्शियल सिलेंडर में हो रही रिफिल…। ब्लैक मार्केटिंग क्रिएट कर रही एजेंसियां LPG सिलेंडर को लेकर सरकार की नई गाइडलाइन जारी होते ही बिहार में रसोई गैस को लेकर हाहाकार मच गया है। गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लगने लगी हैं। सरकार की नई गाइडलाइन जारी होते ही एजेंसियों को भी सिलेंडर की किल्लत का अंदाजा हो गया और वह ब्लैक मार्केटिंग क्रिएट करने में जुट गईं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को इसका इनपुट मिला जिसके बाद पड़ताल में इसकी पुष्टि हुई। एजेंसियां एजेंट्स के जरिए गैस सिलेंडर डंप करा रही हैं। एजेंसियाें से एजेंट्स का नंबर मिल रहा है जो गैस के लिए डील कर कर रहे हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को पटना के दीघा में दिनेश का इनपुट मिला। सड़क पर छोटी सी दुकान है, लेकिन घर से गैस सिलेंडर का बड़ा कारोबार करता है। कई गैस एजेंसियों से सेटिंग कर वह गैस रिफिलिंग का धंधा करता है। अंडर कवर रिपोर्टर होटल संचालक बनकर पहुंचातो वह बड़ी डील करने को तैयार हो गया। छोटी सी दुकान पर बातचीत के बाद वह गली के अंदर घर ले गया जहां से रिफिलिंग का पूरा खेल चलता है। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर खोजिएगा तो नहीं मिलेगा। एजेंसियों से ही सब इधर उधर डंप करा दिया गया है। आप कॉमर्शियल सिलेंडर की खाली टंकी दीजिएगा और हम उसमें घरेलू गैस की टंकी से सीधा रिफिल कर दिया करेंगे। अपने पास हमेशा घरेलू गैस की टंकी रहती है। जितनी चाहिएगा गैस मिलती रहेगी। इस समय बाजार में काफी किल्लत चल रही है। इस धंधे में जो भी है वह व्यवस्था करने में लगा है। अगर अभी से व्यवस्था नहीं हागी तो आने वाले दिनों में काफी संकट हो जाएगा। कॉमर्शियल गैस को लेकर सरकार ने भी नया आदेश दिया है, इसलिए अब यही जुगाड़ करना अच्छा रहेगा। कॉमर्शियल टंकी में घरेलू गैस से रिफिल कर दिया जाएगा। पैसा आपको किलो के हिसाब से देना होगा, एक किलो गैस के लिए आज का रेट 150 रुपए है। जिस दिन जैसा रेटा होगा उतना देना हाेगा। आप कल से दो – दो कॉमर्शियल के खाली सिलेंडर दे जाइए, रात में मैं उसे रिफिल करके रख दिया करुंगा। आप सुबह सिलेंडर ले जाइएगा। आपका काम चलता रहेगा, कहीं कोई समस्या नहीं आएगी। अंडर कवर रिपोर्टर की मुलाकात पटना के कुर्जी में इंडेन गैस एजेंसी के हॉकर आशीष से हुई। वह सिलेंडर डिलिवरी के लिए जा रहा था। बातचीत के दौरान उसने सिलेंडर की डील की है। मोबाइल नंबर देते हुए उसने बाद में बात करने को कहा, बोला जितना चाहिएगा इंतजाम हो जाएगा। सरकार का आदेश आने के बाद गैस सिलेंडर को लेकर मारामारी हो रही है। गैस मिलना मुश्किल हो गया है। शाम तक कोई न कोई उपाय किया जा सकता है। आप अपना नंबर दे दीजिए और मेरा नंबर ले लीजिए। शाम तक गैस की व्यवस्था हो जाएगी। बाद में बात कीजिएगा तो पूरी डिटेल से बातचीत होगी। पैसे कितने देने हैं, यह भी शाम को बता दूंगा। एजेंसी पर भी जाइएगा तो वहां से मना कर दिया जाएगा। हम लोगों का ही नंबर दिया जाएगा। अगर विश्वास नहीं हो तो एजेंसी पर जाकर देख लीजिए, वहां मालिक भी बैठे हैं। यहां से एक भी सिलेंडर इधर-उधर नहीं हो पा रहा है। मैं शाम को ही कुछ कर पाऊंगा। मैं अभी यहां पर ब्लैक में एक भी सिलेंडर नहीं दे पाउंगा। दीघा में गौतम इंडेन गैस एजेंसी पर कर्मचारी नरेंद्र से मुलाकात हुई। एजेंसी पर वह नियम कानून की बात करने लगा। बताया कि गैस के लिए मरामारी का दौर चल रहा है। बिना नंबर के सिलेंडर नहीं मिलेगा। ब्लैक में 18 सौ रुपए तक गैस सिलेंडर मिल रहा है। अंडर कवर रिपोर्टर से उसने ब्लैक में गैस की कोई बात नहीं की, लेकिन फोन पर लगातार ब्लैक में गैस की सेटिंग के लिए डील करता रहा। आपको पहले नंबर लगाना पड़ेगा, उसके बाद ही गैस मिल पाएगी। बुकिंग के लगभग 25 दिनों बाद ही गैस सिलेंडर दिया जाएगा। अपना पूरा पता बताइए, कहां किस रोड में रहते हैं? केवाईसी कराया है या नहीं? अगर केवाईसी नहीं कराया है तो पहले वह कराइए। उसके बाद गैस सिलेंडर की बात कीजिए। अगर 25 दिन पूरे होने के बाद एजेंसी से लेते हैं तो सिलेंडर मिल जाएगा, लेकिन अगर वेंडर के जरिए गैस लेना है तो तीन दिन और लग जाएंगे। 6 मार्च से ही गैस की भारी किल्लत है। ब्लैक में बेचने वाले 1700 से 1800 रुपए तक ले रहे हैं। एक वेंडर को सिर्फ 10 टोकन मिल रहे हैं, जिसे उसे बांटना होता है। इस समय शादी-विवाह का मौसम भी चल रहा है, इसलिए गैस की मांग और ज्यादा बढ़ गई है। फोन पर कर्मचारी बोला – 1500 रुपए लेकर दे देना गौतम इंडेन गैस एजेंसी के कर्मचारी नरेंद्र ने रिपोर्टर से तो कोई ब्लैक की कोई डील नहीं की, लेकिन उसके पास जितनी भी कॉल आई वह ब्लैक की बात करता रहा। रिपोर्टर के सामने कई कॉल आई जिसपर नरेंद्र ब्लैक सिलेंडर की डील करता रहा। एक कॉल पर बात करते हुए नरेंद्र बोला – एक टंकी पहुंचा देना, वहां पैसे ले लेना। दूसरी कॉल पर बोला – एक गैस दे दो ब्लैक में, 1500 रुपए ले लेना। नरेंद्र ने पता भी नोट किया और गैस सिलेंडर के लिए डील की। दूसरी कॉल पर बोला – आप 35 नंबर में चले जाइए, वहां 1500 रुपए रखे हैं। पैसा ले लीजिए और गैस दे दीजिएगा। दीघा सब्जी मंडी के पास हमारी मुलाकात घरेलू गैस सिलेंडर से कॉमर्शियल सिलेंडर की रिफिलिंग करने वाले राहुल से हुई। राहुल ने बताया कि गैस की टंकी में जितना गैस रिफिल होगी 150 रुपए प्रति किलो लगेगा। उसने वजन के हिसाब से रिफिल कर ऑन डिमांड कॉमर्शियल सिलेंडर देने की पूरी डील की। इस समय भरी हुई टंकी मिलना मुश्किल है। आप दो हजार रुपए भी दीजिएगा तो नहीं मिल पाएगी। आप टंकी दीजिए हम रिफिल करके दे देंगे। 150 रुपए किलो के हिसाब से जितना चाहिए गैस मिल जाएगी। आप अपना बड़ा सिलेंडर लेकर आइए, मैं उसमें गैस भरके देता रहूंगा। मैं 19 किलो वाले सिलेंडर से गैस भर रहा हूं। 14 किलो वाले से नहीं भरता। आप सिलेंडर लेकर आइए, मैं भर दूंगा। आपको पता ही है कि 19 किलो वाले में ज्यादा पैसा लगता है। एजेंट राहुल से डील के दौरान वेंडर दया के बारे में जानकारी मिली। दया कॉमर्शियल सिलेंडर की डील करता है। रिपोर्टर से बातचीत के दौरान दया ने 25 सौ रुपए में कॉमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में बेचने की बात कही। उसने कहा, आगे और दिक्कत होने वाली है, अभी तो कम में ही मिल रहा है। मैंने एक आदमी को 2500 प्रति सिलेंडर के हिसाब से 3 कॉमर्शियल सिलेंडर दिए हैं। इस समय गैस की किल्लत है, इसलिए ब्लैक में दिया जा रहा है। अब पहले वाला सिस्टम नहीं रहा कि तुरंत गैस मिल जाएगी। गैस को लेकर काफी बवाल है, ढूंढते रह जाइएगा। आज एजेंसी पर लाठी तक चल रही है। गुस्से में लोग आपस में भिड़ जा रहे हैं। बुकिंग भी नहीं मिल पा रही है। कम से कम 25 दिन का समय चाहिए, तब जाकर गैस मिल पाएगी। आपको थोड़ा इंतजार करना होगा। अभी तक मैंने एक आदमी को 2500 प्रति सिलेंडर के हिसाब से 3 सिलेंडर दिए हैं। हर सिलेंडर पर करीब 300 रुपए ज्यादा लेकर देने पड़ रहे हैं। एजेंट पड़ताल के बाद दे रहे ब्लैक सिलेंडर सरकार के आदेश के बाद पूरी सख्ती है। इसलिए एजेंट और हॉकर भी ब्लैक सिलेंडर देने से पहले पूरी पड़ताल कर रहे हैं। वह रास्ते या गोदाम से ब्लैक सिलेंडर नहीं दे रहे हैं। एड्रेस लेकर संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचकर सिलेंडर डिलीवर कर रहे हैं। हॉकर दया ने रिपोर्टर से पूरी तहकीकात की और घर पर सिलेंडर देने का संकेत दिया। गैस क्यों चाहिए और कहां डिलीवरी करनी है। ऐसे कई सवालों के बाद दया ने कहा आप चंद्रिका जी से मिलिए। वही आपके लिए गैस की व्यवस्था करेंगे। दरअसल सबका इलाका बंटा हुआ है। आप अपनी गली में पहुंचिए, मैं उन्हें वहीं भेज दूंगा। रिपोर्टर की मुलाकात कुर्जी में रेस्टोरेंट चलाने वाले गोविंद से हुई। उन्होंने खुलासा किया कि कैसे ब्लैक में सिलेंडर लेकर कानदार काम चला रहे हैं। पैसे देने के बाद भी ब्लैक में गैस नहीं मिल रही है। आरोप है कि अचानक सरकार का आदेश आने के बाद ही एजेंसियों ने क्राइसिस दिखाकर ब्लैक मार्केटिंग क्रिएट कर दिया है। कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है तो हम ब्लैक में घरेलू गैस खरीदकर काम चला रहे हैं। घरेलू सिलेंडर के लिए भी 1500 से लेकर 2000 रुपए तक देना पड़ रहा है। पिछले दो दिनों से गैस की भारी किल्लत है। बड़े कॉमर्शियल सिलेंडर तो मार्केट से गायब हो गए हैं। अब मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसके लिए भी सामान्य से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। वेंडर जो कीमत बता देता है, उसी दर पर गैस लेनी पड़ती है। वेंडर ऐसा माहौल बता रहे हैं, जिससे लग रहा है कि आने वाले दिनों में दुकान ही बंद करनी पड़ेगी। गैस एजेंसी पर बुकिंग बंद का मैसेज, स्टाफ बोला वेंडर से मिलिए रिपोर्टर ने पटना के एसके पुरी स्थित राजधानी गैस एजेंसी पहुंचकर कॉमर्शियल गैस लेने की बात कही। एजेंसी में बैठे कर्मचारियों ने कहा कॉमर्शियल गैस की बुकिंग नहीं हो रही है। बुकिंग काउंटर पर बैठे रवींद्र ने कहा कि कॉमर्शियल बुकिंग अब बंद हो गई है, आप बाहर वेंडर से बात कर ले सकते हैं। वेंडर से आप जितनी चाहे उतना गैस मिल सकती है। रवींद्र ने ही हमें एक वेंडर मुकेश का नंबर दिया। हम पटना के एसके पुरी स्थित राजधानी गैस एजेंसी के बुकिंग काउंटर पर बैठ रवींद्र से मिले। वेडर मुकेश के नंबर पर जब हमने कॉल किया तो उसने गैस की डील की। वह गैस एजेंसी के ऑफिस के बाहर ही मिला और ब्लैक में गैस सिलेंडर देने को तैयार हो गया। रिपोर्टर – हमें कॉमर्शियल गैस सिलेंडर चाहिए। मुकेश – कॉमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है। पूरे पटना में किसी के पास नहीं है, ऊपर से ही नहीं आ रहा है। रिपोर्टर – हमें बहुत जरुरी है, कहीं से व्यवस्था कर दीजिए। मुकेश – 2500 रुपए लगेंगे, दीजिए तो हम व्यवस्था कर सकते हैं। रिपोर्टर- यह तो बहुत महंगा है? मुकेश – कहीं नहीं है, हमने पहले से स्टॉक करके रखा है, वही आपको रहे हैं। रिपोर्टर – कहां रखें हैं, एजेंसी का रेट कितना है? मुकेश – 2150 रुपए इसका ओरिजिनल रेट है, आपकी परिस्थिति देखकर दे रहे हैं। रिपोर्टर- हमें 15 सिलेंडर चाहिए? मुकेश- इतना नहीं हो पाएगा। आपको 2-3 दे सकते हैं। देखते हैं क्या हो सकता है। रिपोर्टर – कब दीजिएगा, कहां से मिल पाएगा। मुकेश – अगर अभी तुरंत आइएगा तो मिल जाएगा, बाद की गारंटी नहीं है। रिपोर्टर – आप डोमेस्टिक वाले को ही कॉमर्शियल गैस सिलेंडर में भर देंगे क्या? मुकेश- आप लेकर आइए डोमेस्टिक, हम कॉमर्शियल सिलेंडर में भर देंगे। पटना के बोरिंग रोड स्थित कृष्णा अपार्टमेंट के पीछे हमारी मुलाकात राजेश नाम के वेंडर से हुई। राजेश ने बताया कि वह देव सरस्वती गैस एजेंसी से गैस डिलीवर करता है। अंडर कवर रिपोर्टर ने जब रेस्टोरेंट की बात की तो राजेश ब्लैक में कॉमर्शियल सिलेंडर देने को तैयार हो गया। रिपोर्टर – हमें कॉमर्शियल गैस सिलेंडर चाहिए। राजेश – अभी तो बहुत दिक्कत है, लेकिन व्यवस्था कर देंगे। रिपोर्टर – कहीं नहीं मिल रहा है, आप कोई उपाय कीजिए। राजेश – पूरे पटना में कहीं नहीं मिलेगा, हम लोग ही आपको दे सकते है। रिपोर्टर – 12 सिलेंडर की व्यवस्था कर दीजिए। राजेश – कर देंगे, आप मेरा नंबर ले लीजिए आपको फोन कर देंगे। रिपोर्टर – कितने रुपए में पड़ेगा? राजेश – आपको एक सिलेंडर 2500 रुपए का पड़ेगा। रिपोर्टर – बहुत महंगा बता रहे हैं। राजेश – जो भी मिल रहा है, उसे रख लीजिए। बाद में और दिक्कत होगी। रिपोर्टर – कितने सिलेंडर दीजिएगा? राजेश – अभी 6 से 7 की व्यवस्था कर सकते हैं, बाकी और मिल जाएंगे। रिपोर्टर – चारों तरफ खत्म हैं, आप लोगों ने कहां से रखा है? राजेश – हमने पहले से अपने पास स्टॉक कर के रखा था, वही आपको दूंगा। क्राइसिस दिखाकर ब्लैक मार्केटिंग बड़ा खेल भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में गैस की कालाबाजारी का नया ट्रेंड सामने आया है। गैस एजेंसियां क्राइसिस बताकर ग्राहकों को सरकार के नए नियम बता रही हैं जबकि एजेंसियों से जुड़े हॉकर और एजेंट ब्लैक मार्केटिंग का पूरा खेल कर रहे हैं। इन्वेस्टिगेशन के दौरान रिपोर्टर को खुद को मीठापुर के देव सरस्वती गैस एजेंसी का वेंडर होने का दावा करने वाले राजेश ने 12 कॉमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी की बात कहकर अपना नंबर दिया था। राजेश ने दावा किया कि पूरे पटना में कहीं भी ब्लैक में सिलेंडर दे देगा। रिपोर्टर ने कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए जब राजेश को कॉल किया तो उसने पटना के अटल पथ पर एएन कॉलेज के गेट के पास बुलाया। राजेश की बताई जगह पर रिपोर्टर पहुंच गया। लगभग एक घंटे तक इंतजार कराने के बाद राजेश मोपेड से दो कॉमर्शियल सिलेंडर और एक घरेलू सिलिंडर लेकर पहुंचा। कॉमर्शियल सिलेंडर HP कंपनी का था, लेकिन उसपर सील इंडेन गैस की लगी थी। घरेलू सिलेंडर की सील टूटी हुई थी। रिपोर्टर – सिलेंडर तो काफी हल्का है, लग रहा है इसमें से गैस निकाली गई है? राजेश – अरे जल्दी से लीजिए, यह भी कहीं नहीं मिल रहा है। थोड़ा बहुत मैनेज कीजिए, लेना है तो जल्दी से लीजिए। रिपोर्टर – कितने में दे रहे हैं? राजेश – घरेलू वाला 1800 और कॉमर्शियल वाला 2700 रुपए लगेगा। इसे लेकर आप जल्दी से आगे बढ़िए। रिपोर्टर – कोई दिक्कत है क्या? राजेश – दिक्कत है ही, पुलिस का डर है, पुलिस पूछेगी कि कहां से इतने सिलेंडर लाया है। रिपोर्टर – कहीं गैस नहीं मिल रही है तो आपके पास इतनी कहां से आई है? राजेश- मीठापुर के देव सरस्वती एजेंसी से हम गैस लेते हैं। रिपोर्टर – दाम कुछ कम कर दीजिए। राजेश- कीमत तो पहले 2200 रुपए ही था, अभी कहीं नहीं मिल रहा है, इसलिए बढ़ गया है। रिपोर्टर – जब कहीं नहीं मिल रहा है तो आपके पास इतना कहां से आया? राजेश- मैंने पहले से ही स्टॉक करके रखे हैं, होली के समय से ही स्टॉक रखा है, वही बेच रहे हैं। रिपोर्टर – आप दूसरे कॉमर्शियल वाले में घरेलू से भरे हैं क्या? राजेश – क्यों? रिपोर्टर – HP के सिलेंडर पर इंडेन की सील लगी है, वजन में भी कम लग रहा है? राजेश- एचपी, भारत और इंडेन सब एक हो गया है, किसी के भी सिलेंडर पर किसी की सील लग जाती है। अटलपथ पर ही एजेंट रोहित मिला। वह बैट्री रिक्शा में 10 से 12 सिलेंडर लेकर जा रहा था। रिपोर्टर ने रोहित से जब डील की तो वह कॉमर्शियल सिलेंडर देने को तैयार हो गया। ब्लैक में सिलेंडर की मुंहमांगी कीमत पर डिमांड पूरी करने का दावा किया। रोहित ने बताया कि वह राजीव नगर के एचपी एजेंसी के वेंडर से व्यवस्था करके बेचता है। रिपोर्टर – हमें कॉमर्शियल सिलेंडर चाहिए, आप देंगे ? रोहित – अभी तो दिक्कत चल रहा है, लेकिन इधर-उधर से व्यवस्था करके आपको दे देंगे। रिपोर्टर- कितने रुपए लेंगे ? रोहित- 2700 रुपए लगेंगे एक सिलेंडर के। रिपोर्टर- अरे यह तो बहुत महंगा है। रोहित- यह भी नहीं मिल रहा है, मीडिया वाले पीछे पड़े है, चोरी चुपके व्यवस्था करके आपको दे रहे हैं। रिपोर्टर – आप कहा से लाए हैं। रोहित- हम तो राजीव नगर एचपी एजेंसी के वेंडर से व्यवस्था करके लाए है। शादी पार्टी में बड़े पैमाने पर घरेलू गैस खपाने की तैयारी शादी पार्टी और बड़े आयोजनों में घरेलू गैस खपाने की तैयारी है। गैस एजेंसियों से वेंडर घरेलू गैस डंप कर रहे हैं। वह आने वाले समय की स्थिति भांप चुके हैं। इसलिए ब्लैक मार्केटिंग की पूरी तैयारी चल रही है। पटना के तन्या कैटर्स के संचालक अरविंद ने बताया कि अचानक गैस की सप्लाई बंद हो जाने से काफी परेशानी हो गई है। सुबह से गैस सिलेंडर की व्यवस्था के लिए इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक गैस नहीं मिल पाई है। जिसकी बुकिंग ली है, उसे क्या जवाब दिया जाएगा समझ में नहीं आ रहा है। गैस की कमी के कारण कैटरिंग का काम भी प्रभावित हो रहा है। कोयला और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन इससे काम धीमा हो जाता है और लागत भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही गैस की व्यवस्था नहीं हुई तो कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। सिंह कैटर्स के संचालक विकास ने बताया कि उनके पास पहले से कई कार्यक्रमों के ऑर्डर बुक हैं और उन्हें हर हाल में पूरा करना है। विकास ने बताया कि एक कार्यक्रम के लिए करीब 500 थाली का ऑर्डर मिला है, लेकिन गैस की कमी के कारण काम करना मुश्किल हो गया है। जिस गैस सिलेंडर की कीमत सामान्य तौर पर लगभग दो हजार रुपए के आसपास पड़ती थी, वही सिलेंडर अब किल्लत के कारण 5 हजार रुपए में खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में कैटरिंग का पूरा हिसाब गड़बड़ा गया है और खर्च काफी बढ़ गया है। इस स्थिति में अब पुराने डीजल वाले चूल्हे को फिर से चलाकर काम करना पड़ रहा है, ताकि किसी तरह ऑर्डर पूरा किया जा सके।



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