
‘True Life Story’ से शुरू हुई चिट्ठी का अंत एक रोती हुई इमोजी से हुआ। उस नोट में आगे लिखा था- Sorry Papa । जी हां ये कोई ऐसा वैसा नोट नहीं बल्कि गाजियाबाद में खुद को मौत के गले लगाने वाली तीन बहनों का सुसाइड नोट है। पिता को यकीन ही नहीं हो रहा कि बेटियां ऑनलाइन गेम की लत में इस हद तक चली जाएंगी। इस घटना ने हर मां-बाप को बेचैन कर दिया है। हिलाकर रख दिया है क्योंकि मोबाइल हर बच्चे के हाथ में है।
बच्चियों के पिता चेतन ने बताया- निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) को मोबाइल पर ऑनलाइन गेम्स की गंभीर लत थी। कुछ दिन पहले हमने उनके मोबाइल इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। दो साल से तीनों स्कूल नहीं जा रही थीं। पढ़ने में भी कमजोर थीं। कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं। वो हमेशा कहती थीं कि उन्हें कोरिया जाना है। मैं कहता था भी कि वहां जाकर हम करेंगे क्या?
पिता चेतन ने बताया- तीनों मोबाइल पर ऑनलाइन कोरियन गेम्स खेलती थीं। क्या वो टास्क बेस्ड गेम्स थीं, और सुसाइड करना उसी का एक टास्क था, इसकी हमें जानकारी नहीं है। हम लोग सोए थे। उन्होंने हमारे मोबाइल ले लिए थे। फिर कमरा बंद कर दिया था। जब मुझे 2 बजे अपनी बालकनी से कुछ गिरने की आवाज आई तो मैं उनके कमरे में गया। मगर कमरा बंद था। फिर देखा कि तीनों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी थी।
कमरे की दीवार पर लिखा था
जब पुलिस उनके कमरे में गई वो वहां भी दीवार पर लिखा था- मेक मी अ हर्ट ऑफ ब्रोकन। आई एम वेरी अलोन। इसके अलावा सुसाइड नोट में लिखा है- True Life Story (जिंदगी की असली कहानी)। इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, उसे पढ़ लो। क्योंकि ये सब सच है। नीचे रोने की तस्वीर बनाई है। उसके आगे लिखा है- I’m Really Sorry Papa। वहीं, डायरी में लिखा है- We Love Korean Games।
चेतन ने की थी दो शादी, दोनों से थे 5 बच्चे
पता चला है कि तीनों बहनों के पिता चेतन ने दो शादियां की थीं। पहली शादी के कई साल बाद तक संतान नहीं हुई। इसके बाद उसने पहली पत्नी की छोटी बहन यानी साली से दूसरी शादी की। दूसरी शादी से तीन बच्चे हुए, लेकिन किस्मत ने यहां एक मोड़ लिया। इसी दौरान पहली पत्नी से भी दो बच्चे हो गए। इस तरह एक ही घर में दो पत्नियां, पांच बच्चे और एक जटिल पारिवारिक ढांचा खड़ा हो गया। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता था। दोनों पत्नियां, सभी बच्चे सब साथ रहते थे।
लेकिन इसी घर में पनप रही थी एक ऐसी खामोशी, जिसका अंदाजा किसी को नहीं था। जिन तीन बहनों ने अपनी जान दी, उनमें दो दूसरी पत्नी की बेटियां थीं, जबकि एक पहली पत्नी की बेटी थी। तीनों की उम्र कम थी, लेकिन उनके बीच का जुड़ाव असामान्य रूप से गहरा था। तीनों बहनें पिछले दो सालों से स्कूल नहीं जा रही थीं। स्कूल से दूरी, बाहरी दुनिया से कटाव। इन सबने धीरे-धीरे उनकी दुनिया को चार दीवारों और एक मोबाइल स्क्रीन तक सीमित कर दिया।