
Delhi Pollution: राजधानी में एक बार फिर से दमघोंटू हवा के चलते सांसों का संकट छाया हुआ है। यहां प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिसके बाद दिल्ली में ग्रैप 4 लागू किया गया है। केंद्र सरकार के प्रदूषण निगरानी निकाय ने वायु गुणवत्ता के गंभीर स्तर पर पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-4 के तहत सख्त पाबंदियों को लागू किया है। शनिवार को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 428 दर्ज किया गया।
नोएडा-गाजियाबाद में हवा सबसे खतरनाक
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, इन शहरों में हवा का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी से भी ऊपर है, जिससे वायुमंडलीय विषाक्तता का आपातकालीन चरण हो गया है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि अनावश्यक रूप से बाहर ना निकलें, N95 मास्क पहनें, बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें और सुबह-शाम बाहर टहलने से बचें।
अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार (17 जनवरी) को वायु गुणवत्ता ‘गंभीर+’ श्रेणी में पहुंच गई, जिसके बाद ग्रैप के चौथे चरण को फिर से लागू करने किया गया। CAQM के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शनिवार को शाम चार बजे 400 दर्ज किया गया। पश्चिमी विक्षोभ, बेहद प्रतिकूल मौसम और मौसम संबंधी परिस्थितियों तथा प्रदूषकों के फैलाव की कमी के कारण एक्यूआई तेजी से बढ़कर रात आठ बजे 428 हो गया।”
इसके बाद CAQM की सब- कमेटी ने पूरे NCR में GRAP-4 के सभी सख्त प्रतिबंध तत्काल लागू करने का फैसला लिया, जिसके तहत दिल्ली में कारखानों, निर्माण कार्यों, और यातायात पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं। इसमें पहले से लागू GRAP स्टेज-1, 2 और 3 के साथ अब स्टेज-4 के प्रतिबंध भी लागू रहेंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियों को अतिरिक्त सख्ती और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली-NCR में ग्रैप 4 के तहत निर्माण कार्यों और ट्रकों की एंट्री पर रोक लगाई गई है। हालांकि जरूरी सेवाओं की गाड़ियों को छूट दी जाएगी। इसके अलावा, NCR प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और अन्य संबंधित एजेंसियों से क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकने के लिए निवारक उपायों को बढ़ाने के लिए कहा गया है।
स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाया जाएगा, जहां बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से होगी, बच्चों की सेहत और सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।