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दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी काम सुंदरी देवी के निधन के बाद आयोजित श्राद्धकर्म और श्रद्धांजलि कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया 12वीं पर गुरुवार को महाभोज का आयोजन किया गया। ब्राह्मणों को चांदी की थाली, ग्लास, कटोरी, चम्मच और बिस्किट दान में दिए गए। साथ ही AC-कूलर, फ्रिज-वॉशिंग मशीन जैसी चीजें भी दान में दी गईं है। इस अवसर पर राज परिवार की ओर से समस्त मिथिलावासियों को सहयोग, स्नेह और सहभागिता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। श्राद्धकर्म के दौरान विशाल भोज और प्रसाद वितरण कार्यक्रम में हजारों लोग पहुंचे। कल्याणी निवास में दिवंगत महारानी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उन्हें नमन किया। राज परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, दो दिनों में करीब एक लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। भोज में 56 भोग, पारंपरिक मिथिला व्यंजन, मिठाइयां और राजसी खान-पान शामिल रहा। इस विशाल आयोजन के लिए करीब 300 कारीगरों की टीम तैनात रही। श्रद्धांजलि देने राज्यपाल भी पहुंचे मंगलवार को बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान दरभंगा पहुंचे। कल्याणी निवास में दिवंगत महारानी काम सुंदरी देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि दरभंगा राज परिवार का देश, समाज और विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान रहा है। गुरुवार देर रात बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। महारानी के पौत्र कुमार कपिलेश्वर सिंह और कुमार राजेश्वर सिंह ने कहा कि राज्यपाल का श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आना राज परिवार के लिए गौरव और संतोष का विषय है। महामहिम ने राजघराने के सामाजिक एवं शैक्षणिक योगदान को स्मरण करते हुए भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया है। देशभर के विभिन्न राजघरानों से जो किसी कारणवश दरभंगा नहीं पहुंच सके, उन्होंने शोक संदेश भेजकर दिवंगत महारानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। अलग-अलग राजघरानों से शोक संदेश भेजा गया शोक संदेश भेजने वालों में पद्म विभूषण डॉ. महाराजा करण सिंह, डॉ. राजा मानवेन्द्र सिंह, महाराजा ऐश्वर्य चंद्र कटोच, महाराजा शिवेन्द्र पाल, युवराज प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, महाराजा इजीयराज सिंह(कोटा), महाराजा जयेंद्र प्रताप सिंह (बलरामपुर), प्रोफेसर राजेन्द्र चोपड़ा (लंदन), महारानी दिया कुमारी (जयपुर), महारानी राधिका रानी गायकवाड़ (बड़ौदा), महाराजा हर्षवर्धन सिंह (डूंगरपुर), महाराजा वनस्वर्धन सिंह (बूंदी), महाराजा कनक वर्धन सिंह देव (ओडिसा), महाराजा कीर्ति वर्धन सिंह और महाराजा उदयभान नारायण सिंह (हजारीबाग) प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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