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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को पीपराकोठी स्थित कृषि संस्थानों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों का समर्थन करते हुए कहा कि सच्चाई दिखाने वाली फिल्मों का विरोध गलत है। “जो सच्चाई छूपाना चाहते हैं वो विरोध कर रहे” रक्सौल जाते समय पीपराकोठी के कृषि विज्ञान केंद्र में पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सिंह ने कहा कि इन फिल्मों का विरोध वे लोग कर रहे हैं जो देश की सच्चाई जनता तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं। उन्होंने ‘कश्मीर फाइल्स’ को 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं की त्रासदी का चित्रण बताया और कहा कि युवाओं को यह इतिहास जानना आवश्यक है ताकि सामाजिक समरसता मजबूत हो। “वोटबैंक की राजनीति करने वाले को ऐसी फिल्में पसंद नहीं” गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ लव जिहाद, धर्मांतरण और लैंड जिहाद जैसे विषयों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटबैंक की राजनीति करने वालों को ऐसी फिल्में पसंद नहीं आतीं क्योंकि ये सच्चाई उजागर करती हैं। मंत्री ने ऐसी फिल्मों की आलोचना के बजाय सराहना करने की बात कही, ताकि समाज जागरूक हो और नई पीढ़ी वास्तविक घटनाओं से परिचित हो सके। मोतिहारी में कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया अपने भ्रमण के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्र, पशु प्रजनन केंद्र और पंडित दीनदयाल उपाध्याय वानिकी एवं उद्यानिकी महाविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने इन संस्थानों को किसानों की ‘रीढ़’ बताया और कहा कि वैज्ञानिकों के प्रयासों से खेती की दिशा बदल रही है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरा शक्ति सुधारने पर भी जोर दिया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ खेती में नई तकनीकों, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी करने और खेती में रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग पर विशेष जोर दिया। वैज्ञानिकों ने मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए बायोचार और विभिन्न माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के उपयोग पर वैकल्पिक सुझाव दिए। मंत्री ने बताया कि इसका पहला प्रयोग बेगूसराय में किया जाएगा। उन्होंने बेगूसराय में रासायनिक खाद का उपयोग कम करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे और किसानों की पैदावार बेहतर हो सके।
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