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जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी इलाके डोडा जिले से आई एक खबर ने पूरे भोजपुर को शोक में डुबो दिया। भद्रवाह-चंबा अंतरराज्यीय मार्ग पर खन्नी टॉप के पास हुए दर्दनाक हादसे में बिहार का एक और लाल देश के लिए शहीद हो गया। जैसे ही नायक हरेराम कुंवर की शहादत की सूचना उनके पैतृक गांव नथमलपुर पहुंची, गांव की गलियां सन्नाटे में डूब गईं। हर चेहरा गमगीन है, हर आंख नम और हर जुबान पर बस एक ही बात ‘हमने अपना सपूत खो दिया।’ गांव में गम का माहौल बड़हरा प्रखंड के नथमलपुर गांव वार्ड संख्या 9 निवासी किसान इंद्रजीत कुंवर के पुत्र नायक हरेराम कुंवर(38) भारतीय सेना में अपनी सेवा दे रहे थे। हादसे की खबर के बाद गांव में मातम पसर गया है। घर के आंगन में लोगों की भीड़ है, लेकिन बूढ़ी मां और पत्नी बेसुध पड़ी हुई हैं। हालांकि अब तक उन्हें यह मनहूस खबर नहीं दी गई है। हर कोई इस बात से कांप उठता है कि जब यह सच्चाई उनके सामने आएगी, तब वह दर्द कैसे सह पाएंगी। 2011 में बहाल हुए थे हरेराम कुंवर का जीवन संघर्ष, मेहनत और अनुशासन की मिसाल रहा है। वर्ष 2003 में मैट्रिक की पढ़ाई शाहपुर प्रखंड के बरिसवन गांव से पूरी की, जबकि 2005 में इंटरमीडिएट की परीक्षा आरा के महाराजा कॉलेज से पास की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने देशसेवा का संकल्प लिया और सेना में भर्ती हो गए। वर्ष 2011 में दानापुर स्थित बिहार रेजिमेंट की फोर्थ बिहार यूनिट में बहाल हुए। बहन की हालात खराब शहीद हरेराम कुंवर अपने परिवार की मजबूत कड़ी थे। उनके बड़े भाई जय प्रकाश कुंवर गुंडी गांव के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि जुड़वा बहन रिंकी देवी भाई की शहादत की खबर से बदहवास हैं। एक तरफ देश ने एक वीर सपूत खोया है, तो दूसरी तरफ भोजपुर का नथमलपुर गांव अपने उस बेटे के लौटने की राह देख रहा है, जो अब सिर्फ यादों और गर्व के रूप में ही गांव में जीवित रहेगा।
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