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जिला प्रशासन कैमूर ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सशक्त, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। इसी क्रम में सोमवार को भभुआ स्थित लिच्छवी भवन में जिले के सभी विभागों के प्रधान सहायकों और लिपिकीय संवर्ग के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण जिला पदाधिकारी के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य कार्यालयी कार्यों में गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित करना था। कार्यशाला में स्थापना उप समाहर्ता एवं जिला कोषागार पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण प्रदान किया। बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों के प्रधान सहायक और लिपिकीय कर्मचारी इस कार्यशाला में शामिल हुए। सेवा पुस्तिका से प्रोन्नति तक दी गई विस्तृत जानकारी प्रशिक्षण सत्र के दौरान स्थापना उप समाहर्ता ने कर्मचारियों को सेवा पुस्तिका के संधारण, सेवा संपुष्टि, वरीयता सूची निर्धारण, अनुशासनात्मक कार्यवाही, अवकाश नियम, एसीपी/एमएसीपी, प्रोन्नति प्रक्रिया और विभिन्न प्रशासनिक पंजियों के रख-रखाव से संबंधित नियमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सेवा पुस्तिका किसी भी कर्मचारी का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है और इसमें की गई छोटी सी गलती भविष्य में बड़े प्रशासनिक विवाद का कारण बन सकती है। इसलिए सभी प्रविष्टियों का संधारण नियमों के अनुरूप और समय पर किया जाना बेहद आवश्यक है। फाइल प्रबंधन में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त स्थापना उप समाहर्ता ने फाइल प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी कार्यालय की कार्यक्षमता फाइलों के सुव्यवस्थित संधारण पर निर्भर करती है। यदि फाइलें समय पर और सही तरीके से निपटाई जाएं, तो आम जनता के कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होगी। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, प्रधान सहायक और लिपिक किसी भी कार्यालय की आधारशिला होते हैं। नियमों की संपूर्ण जानकारी और सही अनुपालन से ही प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू और त्रुटिरहित रह सकती है। वित्तीय पारदर्शिता पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण दूसरे सत्र में जिला कोषागार पदाधिकारी ने वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं से बचाव, ट्रेजरी नियमों का अनुपालन, ई-ट्रेजरी प्रणाली, तथा बिलों के सही और समयबद्ध भुगतान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि लिपिकीय संवर्ग की भूमिका बजट के उचित आवंटन और सही उपयोग में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। छोटी सी चूक से न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो सकता है, बल्कि संबंधित कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है। ई-ट्रेजरी से बढ़ेगी पारदर्शिता और गति जिला कोषागार पदाधिकारी ने ई-ट्रेजरी प्रणाली को पारदर्शी और तेज बताया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से न केवल भुगतान प्रक्रिया में तेजी आती है, बल्कि भ्रष्टाचार और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाती है। प्रशासनिक सुधार की दिशा में सार्थक पहल कार्यशाला के अंत में अधिकारियों ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में मिली जानकारियों को अपने-अपने कार्यालयों में पूरी निष्ठा के साथ लागू करने की अपील की। जिला प्रशासन का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनेगी। यह प्रशिक्षण कार्यशाला कैमूर जिले में कुशल प्रशासन, वित्तीय पारदर्शिता और बेहतर जनसेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में देखी जा रही है।
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