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कहां खर्च हो रहा नीतीश का बजट बिहार वालों की कमाई बढ़ी फिर भी बिहारी सबसे गरीब क्यों सवाल जवाब में पूरी कहानी…




18वीं विधानसभा और नीतीश सरकार का पहला बजट करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। यह पिछले बजट से करीब 12% ज्यादा है। बजट आज यानी 3 फरवरी को पेश किया जाएगा। वेतन-भत्तों, कर्ज उतारने और रोज के खर्च पर कुल बजट का 37 फीसदी खर्च हो रहा है। पिछले तीन सालों में राज्य सरकार के कर्ज में बढ़ोतरी हुई है। अभी हर बिहारी पर करीब 29 हजार रुपए का कर्ज है। 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय में 14.45% फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़कर 76,490 हजार रुपए हो गई है। हालांकि, यह देश के 34 राज्यों में सबसे कम है। बिहार के बजट को लेकर आपके मन में भी कई सवाल होंगे कि सरकार की कमाई कहां से होती है। कहां-कहां किन चीजों में कितना पैसा खर्च होता है। कितना कर्ज लिया जाता है। इन सवालों के जवाब जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। भास्कर एक्सपर्टः बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी पटना के एसोसिएट प्रोफेसर और इकोनॉमिस्ट डॉ सुधांशु कुमार। सवाल-1: बिहार सरकार को कमाई कहां से होती है? जवाब: नीतीश सरकार को मुख्यतः टैक्स और सेवा शुल्क जैसे स्रोतों से आय होती है। इस कमाई का काफी बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और रोजमर्रा के कार्यों पर खर्च होता है। बजट 2025-26 को ध्यान में रखते हुए इस टेबल के जरिए समझते हैं आय का पूरा गणित….. सवाल-2: राज्य सरकार के पास GST के अलावा कमाई के कौन-कौन से उपाय बचते हैं? जवाब: जीएसटी कलेक्शन से केंद्र राज्यों को हिस्सा जारी करता है। इसके बाद राज्य सरकार के पास प्रमुख रूप से वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और माइनिंग आदि से आय होती है। जैसे- बिहार में पेट्रोल-डीजल GST के दायरे में नहीं आता। सरकार इस पर वैट वसूलती है। पेट्रोल और डीजल के बेस प्राइस पर 48 फीसदी वैट लगता है। जबकि, एक्साइज ड्यूटी 35 फीसदी, सेल्स टैक्स 15 फीसदी और कस्टम ड्यूटी 2 फीसदी लगाई जाती है। सवाल-3: राज्य सरकार को होने वाली कमाई का पैसा कहां-कहां खर्च होता है? जवाब: किसी भी राज्य सरकार के व्यय का प्रतिशत विवरण समय-समय पर बदलता रहता है, क्योंकि यह राज्य के बजट, आर्थिक स्थितियों और नीतियों पर निर्भर करता है। बिहार सरकार कुल बजट का 28.9% पैसा अफसरों-कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च कर रही है। विकास दर 13.1% रहा, जो राष्ट्रीय औसत (9.8%) से 3.3% ज्यादा है। वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव ने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था (GSDP) 2.47 लाख करोड़ रुपए (2011-12) से बढ़कर 9.92 लाख करोड़ रुपए हो गई। राज्य का खर्च 2.82 लाख करोड़ रुपए रहा। जो 2024-25 की तुलना में 11.8% ज्यादा है। 2025-26 के बजट के आंकड़ों के अनुसार, खर्च का अनुमानित ब्योरा इस टेबल से समझते हैं…. खर्च का हिसाब सवाल-4: सामाजिक एवं विकास योजनाओं में हर साल कितना पैसा खर्च होता है? जवाब: बिजली, दवा, मेडिकल जांच, वृद्ध पेंशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि योजनाओं के लिए राज्य सरकार हर साल बजट का 63.38 फीसदी पैसा खर्च कर रही है। सवाल-5: योजनाओं पर खर्च के लिए सरकार कितना कर्जा लेती है? जवाब: खर्चे पूरे करने के लिए सरकार कर्ज ले सकती है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। बिहार में सरकार राज्य के GDP का 3% से ज्यादा कर्ज नहीं ले सकती। बिहार सरकार पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक राज्य सरकार पर 3,74,134 करोड़ रुपए कर्ज था। जो राज्य के GSDP का 37.7% है। सवाल-6: बिहार के कुल बजट का कितने % पैसा अकेले ब्याज में ही जा रहा है। जवाब : बिहार में कुल बजट का 7.5 फीसदी पैसा ब्याज चुकाने में जा रहा है, जो करीब 21 हजार करोड़ सालाना होता है। हर 100 में से 30 बच्चे छोड़ रहे पढ़ाई भारत सरकार के आर्थिक सर्वे रिपोर्ट-2026 के मुताबिक, राज्य में हर में हर 100 में से 30 बच्चे 9-10वीं के बीच पढ़ाई छोड़ दे रहे हैं। जो देश में सबसे ज्यादा है। टीचर-स्टूडेंट रेशियो भी गड़बड़ है। 38 स्टूडेंट पर सिर्फ एक टीचर हैं। हेल्थ सेक्टर में भी खराब स्थिति है। एक लाख लोगों पर 1 डॉक्टर और 21 बेड है।



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