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अमेरिका से करार वाला पहला देश होगा भारत


भारत और अमेरिका के बीच बुधवार को व्यक्तिगत बातचीत शुरू होने के बीच अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क से बचने के लिए भारत पहला देश हो सकता है जो हमारे साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता करेगा।
न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार बेसंट ने बुधवार को करीब एक दर्जन संवाददाताओं के साथ एक गोलमेज बैठक में कहा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता सफल रूप से निष्कर्ष पर पहुंचने के ‘बहुत करीब’ है। इसका कारण दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश ने कोई ‘बहुत ज्यादा शुल्क’ नहीं लगाया हुआ है।

बेसंट ने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठकों के दौरान एक कार्यक्रम में कहा, ‘भारत में गैर-शुल्क व्यापार बाधाएं कम हैं। साथ ही यह भी साफ है कि मुद्रा के स्तर पर कोई गड़बड़ी नहीं है, सरकारी सब्सिडी है, लेकिन वह बहुत कम है। इसलिए भारत के साथ समझौता करना बहुत आसान है।’ वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के दौरान संवाददाताओं से कहा कि भारत बातचीत करके द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत उच्च शुल्क घटाने जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘भारत, विश्व के किसी अन्य देश की तुलना में अधिक शुल्क लेता है। मानें या नहीं, हम भारत के साथ बहुत कम व्यापार करते हैं, क्योंकि उनका शुल्क बहुत ज्यादा है। उन्होंने करीब सर्वाधिक शुल्क (विश्व में) लगा रखा है, जो चीन से ज्यादा है। मुझे लगता है कि वे उन शुल्कों को घटाने जा रहे हैं। दरअसल यह उनकी समस्या है, न कि हमारी।’ हार्ली डेविडसन का उदाहण देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, भारत को बहुत कम निर्यात करता है। ट्रंप ने कहा कि करीब 6 साल पहले, जब उन्होंने हार्ली डेविडसन के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि वे भारत के साथ कोई कारोबार नहीं करते, क्योंकि उनके शुल्क बहुत ज्यादा हैं और वे भारत में संयंत्र लगाने जा रहे हैं। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ‘और उन्होंने यही किया। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो। उन्हें संयंत्र लगाने के लिए मजबूर किया गया। (अगर) कोई शुल्क नहीं होता, तो वे यहां अपना संयंत्र लगाते।’

नामांकित वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का एक दल इस समय वाशिंगटन में है और अमेरिका से व्यापार समझौते पर बात कर रहा है। दोनों पक्षों ने इस वर्ष के अंत तक द्विपक्षीय समझौते के पहले चरण को पूरा करने का संकल्प लिया है, भारतीय अधिकारियों ने 8 जुलाई तक बातचीत के ‘शुरुआती चरण’ को पूरा करने की बात कही है, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी भरकम शुल्क से दी गई राहत की अवधि खत्म होने वाली है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमीसन ग्रीर ने मंगलवार को कहा कि भारत के साथ व्यापार संबंधों में ‘पारस्परिकता का गंभीर अभाव’ है, जबकि उन्होंने द्विपक्षीय समझौते को लेकर भारत की रचनात्मक भागीदारी का स्वागत किया। ग्रीर ने एक बयान में उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा द्विपक्षीय समझौते के लिए शर्तों को अंतिम रूप दिए जाने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा, ‘चल रही बातचीत से संतुलन बनाने में मदद मिलेगी और अमेरिकी वस्तुओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। साथ ही इससे अनुचित गतिविधियों की समस्या का समाधान होगा, जिसके अमेरिका के कर्मचारियों को नुकसान होता है।’

ग्रीर ने कहा, ‘भारत की अब तक की रचनात्मक भागीदारी का स्वागत किया गया है। मैं दोनों देशों में श्रमिकों, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद करता हूं।’ अपने भारत दौरे के समय वेंस ने भारत से गैर शुल्क बाधाएं खत्म करने और अमेरिकी कारोबारियों की बाजार तक व्यापक पहुंच की अनुमति देने का अनुरोध किया। मंगलवार को जारी एक फैक्टशीट में यूएसटीआर कार्यालय ने कहा कि भारत की ओर से लागू औसत शुल्क 17 प्रतिशत है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है, जबकि अमेरिका का लागू औसत शुल्क 3.3 प्रतिशत है। इसने कहा है, ‘शुल्क के अलावा व्यापार में तकनीकी बाधाएं, नियामकीय बाधाएं और सेवाओं, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों की बाजार तक पहुंच में कई प्रतिबंध हैं, जिसकी वजह से अमेरिका का निर्यात प्रभावित होता है।’

(साथ में एजेंसियां)

Trump Tariff से डरना क्यों जरूरी, सबसे ज्यादा सवा 11 लाख करोड़ का है India- US Trade

 

 

 

 

 


First Published – April 24, 2025 | 11:05 PM IST



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