
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार का निधन एक दुखद विमान हादसे में हो गया है। इस हादसे ने पूरे महाराष्ट्र को स्तब्ध कर दिया है। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के भीतर भी जबरदस्त सियासी हलचल मची हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अब NCP की कमान किसके हाथ होगी? बारामती की विरासत को आगे कौन संभालेगा? इस पर मंथन के लिए पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी की बैठक बुलाई जाएगी।
अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत के मजबूत स्तंभ माने जाते थे। वे कई बार उपमुख्यमंत्री रहे और एनसीपी को सत्ता से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई। उनके निधन से एनसीपी (अजित गुट) अचानक नेतृत्वविहीन हो गया है। पार्टी कार्यकर्ता और नेता बारामती से मुंबई तक सदमे में हैं। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है अब NCP की कमान किसके हाथ जाएगी? पार्टी के अंदर और बाहर कई नामों पर चर्चा भी शुरू हो गई है।
एनसीपी पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा? ये फैसला लेने के लिए पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी की बैठक बुलाई जाएगी। पवार परिवार फिलहाल शोक मना रहा हैऔर सूतक के 13 दिन पूरे होने के बाद ही इस विषय पर कोई फैसला करेगा। ऐसे में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी की बैठक कम से कम 13 दिनों बाद हो सकती है।
बैठक में NCP के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। इसके बाद ही ये तय होगा कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन बनेगा? डिप्टी सीएम पद किसे मिले, बारामती सीट पर उपचुनाव में परिवार से किसे उतारे? और जिला परिषद चुनावों के बाद दोनों एनसीपी एक हों या ना हों?
इस बीच जिला परिषद को ध्यान में रखते हुए कुछ सीटों पर दोनों एनसीपी के गठबंधन का फैसला दोनों खेमे से सुनील तटकरे और जयंत पाटिल जैसे नेता करेंगे, जैसा कि नगरपालिका चुनावों में पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में गठबंधन हुआ था। हालांकि ये चर्चा गठबंधन तक ही सीमित है और ना कि मर्जर तक।
इधर कई नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिन्हें लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा भेजा गया था। हालांकि, उनके संगठनात्मक अनुभव सीमित होने और वंशवाद के आरोपों के चलते उन्हें अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है, लेकिन स्थायी कमान मिलना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा की सदस्य हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट से चुनाव लड़ा थी, लेकिन वहां हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। अब अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के भीतर और बाहर से उनकी राजनीतिक भूमिका बढ़ाने की चर्चा तेज हो गई है।